चिकित्सकों से मरहूम है मध्यप्रदेश का पन्ना जिला

मध्यप्रदेश में इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही नहीं तो और क्या माना जाए कि एक तरफ नई-नई बिमारियां रोज दस्तक दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर यहां सूबे के इस जिले में रहने वालों के लिए चिकित्सकीय दृष्टि से कोई पुख्ता इंतजाम सरकार ने नहीं किए हैं। हालात इतने खराब हैं कि जिले की दस लाख की आबादी को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। ऐसा इसीलिए भी कहा जा रहा है क्यों कि यहां डॉक्टरों के करीब 70 फीसदी पद रिक्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा खराब स्थिित प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्रों की है।

राज्य के इस जिले की स्वास्थ्य रिपोर्ट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टरों की कमी के चलते जिला मातृ शिशु मृत्यु दर, कुपोषण, एड्स, मलेरिया, सिलीकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों में यह मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे आगे की पंक्ति में है। वहीं संस्थागत प्रसव होने के बाद बच्चों की मौत यहां सबसे अधिक होती हैं। इसके अलावा अब सामान्य हो चुकी मलेरिया जैसी बीमारियों का भी सही उपचार नहीं मिलने के कारण रोज न जाने कितने लोग मौत की नींद सो जाते हैं। जबकि जिला मुख्यालय में 232 सीटों के जिला अस्पताल के अलावा 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सहित ढेरों उप स्वास्थ्य केन्द्र व आयोग्य केन्द्र हैं। यहां न उपचार की समुचित व्यवस्था है और न ही डॉक्टरों की।

निजी अस्पताल नहीं होने से हालात और खराब

पन्ना का यह दुर्भाग्य ही माना जा सकता है कि एक ओर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर जैसे प्रदेश के जिले मेडिकल सुविधाएं देने में हब का रूप ले चुके हैं, तो दूसरी तरफ मुरैना, शिवपुरी, गुना, बैतूल, छतरपुर, हरदा, होशंगाबाद, मंदसौर, रतलाम जैसे जिलों में तमाम निजि चिकित्सालय चल रहे हैं, वहीं इस जिले में कोई भी प्राईवेट नर्सिंग होम या अस्पताल नहीं है जिसके कारण बिमारों का एक ही सहारा बचना है, वह है सरकारी अस्पताल। स्वास्थ्य व्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है यह साफ दिखाई देने के वाबजूद यहां सरकारी स्तर पर कोई सकारात्मक प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। इस संबंध में दिनेश उमरे, हरीश पाण्डे, मनोज जायसवाल ने हिस को बताया कि सरकारी अस्पताल की सेवाएं लेना हमारी मजबूरी है। पन्ना अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है, डिजिटल एक्सरे के लिए लोगों को जिले के बाहर जाना पड़ता है। यहां तक कि कई प्रकार की पैथॉलाजी जांच, सीटी स्कैन, एमआर आर आदि के लिए अन्य शहरों की ओर रूख करना हमारी मजबूरी बन गई है।

10 लाख की आबादी पर 37 डॉक्टर

जिलेभर में 107 डॉक्टरों की आवश्यकता है । लेकिन वर्तमान में महज 37 डॉक्टर ही अपनी सेवा दे रहे हैं। जिले में इन 37 डॉक्टरों के भरोसे ही 10 लाख की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है । सी.एम.एच.ओ. कार्यालय से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय सहित जिला क्षय केन्द्र, फाइलेरिया सर्वेक्षण केन्द्र, नेत्र चलित इकाई, शहरी परिवार कल्याण केन्द्र, ट्रामा सेंटर में कुल 48 डॉक्टरों की आवश्यकता है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर के 25 पदों पर महज 11 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं जबकि चिकित्सा अधिकारी के रूप में स्वीकृत 23 पदों में सिर्फ 14 ही उपलब्ध हैं।

22 विशेषज्ञों में एक भी पदस्थ नहीं

जिले भर के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का हाल तो और भी बुरा है। यहां स्वीकृत 22 विशेषज्ञ चिकित्सकों में से कोई एक पद पर भी यहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। जबकि 37 स्वीकृत चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर 14 डॉक्टर्स पूरे जिले का जिम्मा संभाले हैं। इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है, कि चिकित्सकों, कार्यालय स्टाफ से लेकर मेडिकल स्टाफ तक की कमी से जूझते इस जिले में संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं कितनी बदहाल होंगी।

जिला चिकित्सालय व शहरी केन्द्रों में उपलब्धता

पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त

विशेषज्ञ चिकित्सक 25 11 14

चिकित्सा अधिकारी 23 14 09

सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थिति

पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
विशेषज्ञ चिकित्सक 22 00 22
चिकित्सा अधिकारी 37 14 23

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