17 साल से बंद पड़ी कॉलेज की मशीनें

पन्ना । 1998 में टेक्निकल कॉलेज पॉलीटेक्निक को हैण्ड ओवर कर दिया गया, तब से यहां मैकेनिकल व्यवसाय पाठ्यक्रम बंद हो गया। करीब 17 साल गुजरने के बाद लाखों की लागत से खरीदी गई मैकेनिकल मशीन धूल और जंग खा रहीं हैं। कई मशीनें तो जाम तक हो चुकी हैं इसके बावजूद भी छात्र बंद मशीनों से प्रशिक्षण ले रहे हैं। पॉलीटेक्निक कालेज में लाखों रूपये लागत की मैकेनिकल मशीनों की हालत खराब है।

एक अनुमान के मुताबिक एक मशीन की कीमत 4 से 5 लाख रूपये हो चुकी है इसका कारण भी है कि जब टेक्निकल कालेज था तब इन मशीनों को उपयोग में लाया जाता रहा और प्रशिक्षणार्थी इन्ही मशीनों के सहारे प्रेक्टिकल करते रहे, मगर 1998 में उक्त व्यवसाय पाठ्यक्रम बंद कर पॉलिटेक्निक को हैण्ड ओवर कर दिया गया, जहां कम्प्यूटरीकृत कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाने लगा और इन मशीनों का उपयोग होना बंद कर दिया गया।

पूर्व मंत्री ने फिर कराई शुरूआत

विधानसभा पवई क्षेत्र के पूर्व कृषि राज्य मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने पवई विधानसभा क्षेत्र में पॉलीटेक्निक का शुभारंभ कराया, लेकिन क्षेत्र में संस्था को भवन उपलब्ध न हो सका, जिसके लिये पन्ना पॉलीटेक्निक में ही इसका संचालन कराया गया। जहां मेकेनिकल कोर्स के अलावा अन्य कोर्स भी चले, मगर मैकेनिकल के नाम पर कुछ भी नहीं रहा तो पढऩे वाले छात्र किस चीज से प्रशिक्षण दिया जाता रहा। पन्ना पॉलीटेक्निक के नाम पर बंद मशीन दिखाकर इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता रहा। पन्ना पॉलीटेक्निक में भले ही उक्त व्यवसाय पाठ्यक्रम बाद में बंद हो गये हों, लेकिन पवई में मैकेनिकल का कोर्स चार वर्षों से चल रहा है जहां न भवन है और न स्टॉफ अब आप खुद अनुमान लगा सकते हैं, कि पवई पॉलीटेक्निक के छात्र क्या क्या पढ़ते हैं।

17 साल से कटा विद्युत कनेक्शन

इस संबंध में पवई पॉलीटेक्निक के प्राचार्य ने बताया कि अभी तक उक्त मशीनें पवई को हैण्डओवर नहीं की गई, विद्युत कनेक्शन कटा हुआ है। भारी मशीनों को चलाने के लिए तीन फेस का कनेक्शन चाहिए, जिसके लिये विद्युत मंडल से चर्चा की गई लेकिन, कितना बकाया है, यहां इसका कोई रिकोर्ड उपलब्ध न हो सका तो वही विद्युत मंडल में रिकार्ड की माने तो 2 लाख रूपये की राशि बकाया है । पवई पॉलीटेक्निक संस्था को चालू हुये चार वर्ष हो चुके हैं।

पूर्व मंत्री के कार्यकाल में इनकी विधानसभा में इसका शुभारंभ तो कर दिया गया लेकिन संस्था के लिये भवन उपलब्ध नहीं कराया गया। शासन द्वारा भवन के लिये जमीन और निर्माण के लिये लगभग 7 करोड़ 81 लाख भी विभाग द्वारा भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका। जिस स्थान पर पॉलीटेक्निक भवन बनकर तैयार होना था उस जगह लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया। संस्था के प्राचार्य ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग अतिक्रमण न हटा सका, बाद में संस्था के स्टाफ ने खुद अतिक्रमण हटाने का काम कर भवन निर्माण कराये जाने का दबाव विभाग पर बनाया, तब कहीं जाकर निर्माण कार्य शुरू हो सका।

कहां बैठे 160 विद्यार्थी

करीब चार वर्षों बाद पवई क्षेत्र में पॉलीटेक्निक कालेज की नीव डाली गई, जिसमें मैकेनिकल के अलावा अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को प्रशिक्षण दिया जाना था, लेकिन शासन ने तो शुभारंभ कर दिया मगर उक्त संस्था को भवन मुहैया न करा सका और न ही व्यवसायिक पदो की पूर्ति कर सका। ऐसे में लगभग 160 प्रशिक्षर्थी कहां पढ़ते होंगे और किस चीज का पे्रक्टिकल करते होंगे, अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन संस्था द्वारा पवई पॉलीटेक्निक के छात्र पन्ना पॉलीटेक्निक में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिन्हें काफी कठनाइयों उठानी पड़ती हैं। इस संबंध में पवई का और काम पन्ना में क्षेत्रवासी अपने क्षेत्र में इसका संचालन कराना चाहते हैं ताकि इनके बच्चों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

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