उत्तर प्रदेश ने एएमआरयूटी योजना के अंतर्गत 2015 -16 के लिए 3287 करोड़ रुपए शहरी बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश करने का प्रस्ताव किया

राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर जल आपूर्ति और सीवरेज सेवाओं की रिपोर्ट

गाजियाबाद को 352 करोड़ रुपए, लखनऊ को 305 करोड़ रुपए, कानपुर को 200 करोड़ रुपए, इलाहाबाद को 190 करोड़ रुपए, वाराणसी को 180 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे

1409 करोड़ रुपए की केन्द्रीय सहायता की मांग

उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी पुनर्जीवन एवं परिवर्तन के लिए अटल मिशन (एएमआरयूटी) के अंतर्गत 2015-16 के लिए 60 शहरों में जल आपूर्ति और सीवरेज सेवाओं में सुधार तथा हरित स्थानों और पार्कों के लिए 3287 करोड़ रुपए निवेश की कार्ययोजना शहरी विकास मंत्रालय को सौंपी है। इसमें से 1519 करोड़ रुपए 60 मिशन शहरों में जल आपूर्ति योजनाओं के लिए, 1698 करोड़ रुपए 24 शहरों में सीवरेज परियोजनाओं पर और 58 शहरों में खुला स्थान उपलब्ध कराने के लिए 70 करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे।

अटल मिशन के अंतर्गत 2015-16 के लिए राज्य की वार्षिक कार्ययोजना में बताया गया है कि शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय औसत की तुलना में राज्य में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन 60 मिशन शहरों में औसत जल आपूर्ति प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 161 लीटर बताई गई है, जबकि देश के शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय औसत 70 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति है। शहरी आवासों में पानी के नलके 54 प्रतिशत है, जबकि देश में यह 50 प्रतिशत है। देश के शहरी आवासों में 69 प्रतिशत शौचालय की तुलना में इन 60 शहरों के 87 प्रतिशत आवासों में निजी शौचालय हैं। सीवरेज सुविधा 34 प्रतिशत तक उपलब्ध है, जबकि देश में यह सुविधा केवल 12 प्रतिशत तक है।

एसएएपी के तहत 2015-16 के लिए राज्य सरकार ने गाजियाबाद में बुनियादी सुधार के लिए 352 करोड़ रुपए निवेश करने का प्रस्ताव किया है, जिसमें से जल आपूर्ति (45 करोड़ रुपए) और सीवरेज सुविधा सेवाओं (307 करोड़ रुपए) पर किया जाएगा, जो सभी 60 मिशन शहरों में से सबसे अधिक है। लखनऊ के लिए 305 करोड़ रुपए, झांसी के लिए 223 करोड़ रुपए, कानपुर के लिए 200 करोड़ रुपए, इलाहाबाद के लिए 190 करोड़ रुपए, वाराणसी और मोदीनगर के लिए 180-180 करोड़ रुपए, मिर्जापुर के लिए 140 करोड़ रुपए, मेरठ के लिए 125 करोड़ रुपए, मुरादाबाद के लिए 109 करोड़ रुपए, बुलंदशहर के लिए 107 करोड़ रुपए, गाजीपुर के लिए 98 करोड़ रुपए, सहारनपुर के लिए 80 करोड़ रुपए और रायबरेली के लिए भी 65 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इन 60 शहरों में वर्तमान में अमरोहा में 45 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और गाजीपुर में सबसे अधिक 300 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन जल आपूर्ति उपलब्ध है। 32 शहरों और कस्बों में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से अधिक जल आपूर्ति है, जो देश के शहरी क्षेत्रों के लिए निर्धारित मात्रा से अधिक है। 11 शहरों और कस्बों में यह 100 और 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन है। राज्य सरकार ने अपनी एसएएपी में कहा है कि “आंकड़े दर्शाते हैं कि एएमआरयूटी के अधिकतर शहरों में पर्याप्त जल आपूर्ति उपलब्ध है।”

मिशन शहरों के आवासों में 54 प्रतिशत पानी के नलकें हैं और 2019-20 तक इन्हें 100 प्रतिशत करने की योजना है। राज्य सरकार का मिशन शहरों में गैर-राजस्व जल (एनआरडब्ल्यू- उपयोगिता शुल्क के बिना जल आपूर्ति) शुल्क कम कर 20 प्रतिशत करना।

सीवरेज सुविधा सेवाओं को बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि वर्तमान में 20 मिशन शहरों में इस तरह की सेवाएं उपलब्ध नहीं है और शेष शहरों में से यह सुविधा इटावा में 0.05 प्रतिशत से लेकर मैनपुरी में 94 प्रतिशत तक है। इस संबंध में 14 नगर निगमों में स्थिति बेहतर है।

अटल मिशन के अंतर्गत शहरी आवासों के लिए 135 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति जल आपूर्ति सुनिश्चित करना और बेहतर सीवरेज सुविधा प्रदान करना है।

केन्द्र सरकार का 10 लाख से कम आबादी वाले मिशन शहरों के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक सहायता के लिए 50 हजार करोड़ रुपए और 10 लाख से अधिक की आबादी के शहरों के लिए एक तिहाई लागत की सहायता देने का प्रावधान है। शेष राशि राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जुटाई जानी चाहिए।

60 मिशन शहरों में से 7 शहर – लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद में 10 लाख से अधिक आबादी है। 45 कस्बों की आबादी एक से पांच लाख के बीच है। सबसे कम आबादी- 1,01,241 कासगंज की है।

राज्य सरकार ने बताया है कि उत्तर प्रदेश में शहरी आबादी 1991 में 190 लाख थी, जो 2011 में बढ़कर 445 लाख हो गई है और अब यह देश की शहरी आबादी का 12 प्रतिशत है।

देश के एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों और कस्बों तथा राजधानियों को अटल मिशन में शामिल किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता प्रत्येक राज्य को कुल शहरी आबादी और शहरी स्थानीय निकायों की संख्या के आधार पर दी जाती है।

शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश की एएमआरयूटी कार्य योजना-2015-16 पर इस महीने की 10 तारीख को विचार किया जाएगा।

अब तक मंत्रालय ने 13 राज्यों के कुल 286 शहरों और कस्बों के लिए इस योजना को मंजूरी दी है।

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