16 दिसंबर से दवा केमिस्ट हड़ताल पर

भोपाल। दवा और विपणन प्रतिनिधी 16 दिसंबर को अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर रहें है। दवा प्रतिनिधियों की श्रम कानूनों के पालन एवं विस्तार, श्रम कानूनों में संशोधन तथा जनहितकारी दवा नीति लागू करने संबंधी मांगे है।

एमपी-सीजी मेडिकल और सेल्स रिप्रजेनटेटिव यूनियन के महासचिव शेलेन्द्र शर्मा ने बताया कि अखिल भारतीय संगठन फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेन्टेटिव्स एसोसिएशन्स आफ इंडिया (एफएमआरएआई) के आह्वान पर मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ मेडिकल एवं सेल्स रिप्रजेन्टेटिव्स यूनियन (एमपीएसआरयू) के लगभग दस हजार सदस्य 16 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। शर्मा का आरोप है कि केन्द्र सरकार की श्रम कानून लागू करने में कमजोरी और इन कानूनों में निहित खामियों का लाभ उठाकर नियोक्ताओं ने एक अराजक स्थिति पैदा कर दी है। इसके चलते बड़े पैमाने पर दवा प्रतिनिधियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों से संघर्ष के पश्चात औद्योगिक त्रिपक्षीय समिति का वर्ष 2013 में गठन हुआ, लेकिन सरकार के कई आश्वासनों के बावजूद इस समिति की कोई बैठक नहीं बुलाई गई और औद्योगिक त्रिपक्षीय कमेटी सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है।

आज सोमवार 14 दिसंबर से देश भर में दवा केमिस्ट हड़ताल पर हैं-

ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ देश के करीब 8.50 लाख केमिस्ट हड़ताल पर हैं। दवाओं की दुकानें बंद होने से मरीज परेशान हैं। इस बीच सरकार की तरफ से कहा गया है कि देश में ऑनलाइन दवा बेची जाए या नहीं इस पर एक कमिटी बनाई गई है और सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। कमिटी की रिपोर्ट के बाद कोई गाइडलाइन तैयार होगी। केमिस्टों का मानना है कि ये सब रिटेल कारोबार को खत्म करने की कोशिश है, केमिस्टों का मानना है कि दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर खतरा है। केमिस्ट सरकार की ई-फार्मेसी पॉलिसी का भी विरोध कर रहे हैं। ऑनलाइन के खिलाफ दलील ये भी है कि जब देश में कानून ही नहीं है तो कैसे दवाएं इंटरनेट पर बेची जा रही हैं, तो वहीं ऑनलाइन के पक्ष में काराबोरियों का कहना है कि जब खाने से लेकर जूते तक ऑनलाइन उपलब्ध है तो दवा क्यों नहीं मिल सकती है। देश में दवा का कारोबार इस वक्त करीब 60,000 करोड़ रुपये का है इसलिए कई कंपनियों की नजर इस पर है।

महाराष्ट्र में 55,000 केमिस्ट हड़ताल पर हैं और हिमाचल प्रदेश में 5000 केमिस्ट हड़ताल पर है। चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा में 35,000 केमिस्ट हड़ताल पर हैं। वहीं उड़ीसा में 20,000 केमिस्ट की हड़ताल जारी है। केमिस्ट ऑनलाइन दवा बेचे जाने से नाराज हैं और ऑनलाइन बिक्री से केमिस्ट की बिक्री पर 50 फीसदी तक असर हो रहा है। फिलहाल देश में ऑनलाइन दवा बिक्री की इजाजत नहीं है फिर भी दवाएं ऑनलाइन मिल रही हैं।

देश के केमिस्ट हड़ताल के पक्ष में दलील दे रहे हैं कि ऑनलाइन सेल से गलत दवा की बिक्री भी हो सकती है और ऑनलाइन दवाएं प्रिस्क्रिप्शन के बिना भी लेना भी आसान हो गया है। ऑनलाइन दवा की असली-नकली की पहचान मुश्किल होती है। वहीं ऑनलाइन दवा बिक्री के पक्ष में दलील दी जा रही है कि ई-कॉमर्स के दायरे में दवा भी आनी चाहिए और ऑनलाइन के जरिए सस्ती दवा मिल जाती है। आज के जमाने में ई-फार्मेसी जरूरी हो गई है।

सरकार ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री की समीक्षा के लिए कमिटी बनाई है और इस कमिटी की रिपोर्ट आने तक ई-फार्मेसी पर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। कमिटी की रिपोर्ट के बाद ही सरकार फैसला लेगी। हालांकि सरकार ने आश्वस्त किया है कि ई-फार्मेसी पर फैसला लेने से पहले वो सबकी राय लेगी।

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