राष्‍ट्रपति ने कहा हमारे देश की समृद्ध विविधिता, विचारों का समावेशन, भिन्‍नताओं का समायोजन अ‍थवा दृष्टिकोणों की विविधता को आत्‍मसात करते हुए युवाओं को इन्‍हें अपने लोकतांत्रिक व्‍यवहार में अंतर्निहित

राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज राष्‍ट्रपति भवन से वीडियो वार्तालाप के माध्‍यम से ‘युवा और राष्‍ट्र निर्माण’ विषय पर उच्‍चतर शिक्षण संस्‍थानों के संकायों और छात्रों एवं सिविल सेवा अकादमियों को नव वर्ष का एक संदेश दिया।

छात्रों और संकाय को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि देश की समृद्ध विविधिता, विचारों का समावेशन, भिन्‍नताओं का समायोजन अ‍थवा दृष्टिकोणों की विविधता को आत्‍मसात करते हुए युवाओं को इन्‍हें अपने लोकतांत्रिक व्‍यवहार की भावना में अंतर्निहित करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का विचार हमारे राष्‍ट्र की चेतना में गहरी पैंठ बनाए हुए है। एक सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण के लिए इस भावना को युवाओं के मस्तिष्‍क में और मजबूती से समाहित करना होगा। जब तक राष्‍ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की सभी मामलों में समान सहभागिता और समान संख्‍या नहीं होती, तब तक सभी प्रयास अधूरे रहेंगे। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं के प्रति श्रद्धा की भावना को घर के बच्‍चों और शैक्षणिक संस्‍थानों में स्‍थापित किया जाना चाहिए। राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस भावना के लिए छोटी आयु से ही सामाजिक व्‍यवहार से मार्गदर्शन करना चाहिए।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि सरकार ने वित्‍तीय समावेशन, मॉडल ग्रामों का निर्माण और एक डिजिटल सशक्‍त समाज के गठन के लिए कार्यक्रमों का शुभारंभ किया है। उन्‍होंने कहा कि भारत की इस महत्‍वाकांक्षा को पूरा करने के लिए कार्यान्‍वयन के माध्‍यम से पर्याप्‍त अवसरों का सृजन करना होगा। एक ऐसा राष्‍ट्र जिसमें नौकरशाहों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, सामाजिक प्रेरकों, चिंतकों और कृषि विज्ञानियों का सृजन करना होगा, ताकि एक ऐसे भारत का निर्माण किया जा सके, जहां सभी नागरिकों के जीवन से जुड़ी सभी आवश्‍यकताओं को उत्‍कृष्‍ट रूप से सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह एक स्‍वच्‍छ भारत, स्‍वस्‍थ भारत, डिजिटल रूप से सशक्‍त भारत, शिक्षित और कुशल भारत, एक सहिष्‍णु, सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण भारत होगा, जहां हर व्‍यक्ति देश की इस विकास गाथा में अपनी भूमिका को महसूस करेगा।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे स्‍वप्‍नों के भारत निर्माण के लिए हम सबको मिलकर एक पारिस्थितिकी-व्‍यवस्‍था को विकसित करना होगा, जिसमें नवीन अविष्‍कारकों, उद्यमियों और वित्‍तीय निवेशकों का समन्‍वय होगा, जहां विज्ञान, तकनीकी और नवाचार को प्राथमिकता देने के साथ-साथ इनको प्रधानता भी दी जाएगी। सरकार, कॉरपोरेट और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सभी सृजनात्‍मक शक्तियों को स्‍वतंत्र, सुलभ और सहायक वातावरण प्रदान करना होगा। उच्‍चतर शिक्षा संस्‍थानों को अपने छात्रों की उद्यमशिलता की क्षमताओं को परिष्‍कृत करने में स्‍पष्‍ट भूमिका निभानी होगी। हमारे संस्‍थानों में एक पाठ्यक्रम के तौर पर उद्यमशीलता अध्‍ययन का शिक्षण एक बेहतर शुरूआत होगी।

राष्‍ट्रपति ने सभी शिक्षण और नागरिक सेवा संस्‍थानों से अपने छात्रों को पूर्ण रूप से आत्‍मसात करने और उनमें सामाजिक दायित्‍व की भावना भरने का आह्वान किया। उन्‍होंने समुदाय के साथ छात्रों के जुड़ाव के लिए महत्‍वपूर्ण सुझाव भी दिए। इन सुझावों में प्रतिमाह कम से कम एक घंटे के लिए पास के सरकारी विद्यालयों में उनको शिक्षण में शामिल करना, आस-पड़ोस के लोगों के जीवनस्‍तर में सुधार के लिए समुदाय-आधारित परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए उन्‍हें तैनात करना, ग्रामों द्वारा सामना की जा रही समस्‍याओं का पता लगाने के लिए उन्‍हें कार्यभार सौंपना और अत्‍याधुनिक तकनीक के साथ अभिनव समाधानों पर कार्य करना शामिल है।

यह संबोधन वेबसाइट http://webcast.gov.in/president/ पर भी उपलब्‍ध है।

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