सिंहस्थ प्रश्न बैंक में जुड़े 12 हजार प्रश्न और उत्तर

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उज्जैन में 21 अप्रैल से 20 मई तक होने वाले सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये प्रश्न-उत्तर बैंक तैयार किया जा रहा है। अब तक सिंहस्थ से जुड़े लगभग 12 हजार प्रश्न और उनके उत्तर इस बैंक से जोड़े जा चुके हैं। उम्मीद है कि प्रश्न बैंक में करीब 30 हजार प्रश्न और उनके उत्तर जुड़ सकेंगे।

प्रश्न बैंक में सिंहस्थ में कार्य कर रहे सभी सरकारी विभागों से जुड़े संभावित प्रश्न और उनके उत्तर संकलित किये जा रहे हैं। प्रश्‍न बैंक के जरिये श्रद्धालुओं को रेलवे,बस, धर्मशालाएँ, दर्शनीय स्थल, प्रमुख स्नान की तिथियाँ, व्यवस्था में लगे अधिकारियों के फोन नम्बर, स्वास्थ्य और सफाई संबंधी सुविधाओं की जानकारी कॉल-सेन्टर से मिल सकेगी। यह जानकारी मोबाइल एप और सिंहस्थ वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी।

त्रिवेणी जोन में तेजी से हो रहे है मूलभूत सुविधाओं के कार्य

सिंहस्थ मेला क्षेत्र में त्रिवेणी जोन में मूलभूत सुविधाओं और सौन्दर्यीकरण के काम तेजी से किये जा रहे हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा पेविंग ब्लॉक लगाने, घाटों पर पेंटिंग, लाइटिंग,रेलिंग, ओटलों की मरम्मत के कार्य प्रमुख रूप से किये जा रहे हैं। त्रिवेणी सेक्शन में शनि मंदिर और चारों घाट पर विकास के कार्य 50 प्रतिशत किये जा चुके हैं। इन जगहों पर विद्युत खम्बों को पेंट किया जा रहा है। पीएचई द्वारा त्रिवेणी जोन में 50 हजार लीटर क्षमता की उच्च-स्तरीय टंकी बनाई गई है। इसे गऊ घाट प्लांट से जोड़ा गया है। शनि मंदिर परिक्षेत्र में 5000 लीटर क्षमता के 5 सिस्टर्न बनाये गये हैं। इन्हें टंकी के माध्यम से भरा जायेगा। जल संसाधन द्वारा भी ‍िक्षप्रा के घाटों पर विकास के काम किये जा रहे हैं।

उज्जैन नगर निगम द्वारा मेला क्षेत्र में विजिटर्स फेसिलिटी सेन्टर का निर्माण, शहरी क्षेत्र में टायलेट सुधार, पुष्कर सागर और मेला क्षेत्र में 5 हजार अतिरिक्त अस्थाई शौचालय का निर्माण करवाया जा रहा है। नगर निगम के 7 सिविल कार्य पूरे हो गये हैं और 12 प्रगति पर हैं। सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस द्वारा करीब 91 किलोमीटर में बेरिकेटिंग की जायेगी। इस पर लगभग 12 करोड़ की राशि खर्च होगी।

सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 1748 भू-खण्ड आवंटित
सिंहस्थ मेला क्षेत्र में अब तक साधु-संत और विभिन्न संस्थाओं को 1748 भू-खण्ड आवंटित किये जा चुके हैं। काल-भैरव क्षेत्र में 131, मंगलनाथ क्षेत्र में 741, दत्त अखाड़ा में 771 और महाकाल क्षेत्र में 105 भू-खण्ड आवंटित किये जा चुके हैं।

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