सिंहस्थ के लिये बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा ई-गेलरी निर्माण शुरू

सिंहस्थ के लिये बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा ई-गेलरी निर्माण शुरू

उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ के लिये मेला क्षेत्र में बैंकों द्वारा लगातार कार्य किये जा रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान एटीएम, मोबाइल एटीएम, डेबिट-कार्ड, पाइंट ऑफ सेल मशीन, सिक्का वितरण मशीन, फॉरेन एक्सचेंज जैसी कई सुविधा श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवायी जायेंगी। इसके लिये बैंकों द्वारा भू-खण्डों पर ई-गेलरी का निर्माण किया जा रहा है। बैंक ऑफ इण्डिया ने ई-गेलरी का निर्माण शुरू कर दिया है। गेलरी मंगलनाथ जोन के खाक चौक में बनायी जा रही है।

ई-गेलरी में कई विशेषताएँ होंगी। इनमें एटीएम, डिपाजिट मशीन, क्वाइन डिस्पेंसर मशीन होगी। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 20 बैंक द्वारा श्रद्धालुओं को बैंकिंग सुविधा दी जायेगी। मेला क्षेत्र में 12 चलित मोबाइल एटीएम वाहन संचालित किये जायेंगे। बैंकों द्वारा पूरे मेला क्षेत्र में 35 एटीएम स्थापित किये जा रहे हैं। इतने ही एटीएम मेला क्षेत्र से लगे महाकाल, हर-सिद्धि, काल-भैरव, भैरवगढ़, रामघाट इत्यादि क्षेत्र में भी संचालित होंगे।

उज्जैन में बने वर्ल्ड रिकार्ड हुए प्रमाणित

उज्जैन में सिंहस्थ के मद्देनजर इस वर्ष 24 जनवरी को क्षीरसागर मैदान में फैमिली हेरीटेज वॉक और 26 जनवरी को साइक्लोथॉन का आयोजन किया गया था। फैमिली हेरिटेज वॉक में शहर के 6300 नागरिक ने सहभागिता करते हुए 2 किलोमीटर की वॉक की थी। इसी तरह 26 जनवरी, 67वें गणतंत्र दिवस पर साइक्लोथॉन का आयोजन किया गया था। आयोजन में साइकिल पर ग्रीन उज्जैन-क्लीन उज्जैन का संदेश लेकर नागरिक शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कार्तिक मेला ग्राउण्ड पहुँचे थे। इन दोनों कार्य के लिये पूर्व में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की ओर से प्रोवीजनल प्रमाण-पत्र प्रदान कर दिये गये थे। अब गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की कमेटी ने वीडियो रिकार्डिंग देखने के बाद इसकी अधिकारिक पुष्टि कर दी है।

प्रदेश में पशुपालन, मत्स्य और रेशम उत्पादन को मिले बढ़ावा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिये पशुपालन, मत्स्य एवं रेशम पालन को प्रोत्साहित किया जाये। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करवाई जाये। प्रत्येक जिले में निजी क्षेत्र में दो-दो मॉडल डेयरी स्थापित की जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस संबंध में चर्चा की। उन्होंने किसानों की आय अगले पाँच वर्ष में दोगुना करने की रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श किया। पशु ,कुक्कुट, मत्स्य एवं रेशम पालन के प्रस्तावित रोड मेप पर चर्चा की गई। इस मौके पर मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन, कुक्कुट, रेशम एवं मत्स्य-पालन किसानों की आमदनी बढ़ाने के सशक्त माध्यम हैं। इन क्षेत्रों में दुनिया में उपयोग की जाने वाली सर्वोत्तम तकनीक एवं विधि को प्रदेश में अपनाया जाये। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने में बहुत सहायक है। पशु नस्ल सुधार, पशु आहार उपलब्धता एवं दूध की बिक्री आदि की और बेहतर व्यवस्थाएँ की जायें। उन्होंने प्रत्येक जिले में निजी क्षेत्र में कम से कम दो आदर्श डेयरी स्थापित करवाने के लिये अधिकारियों को कहा। उन्होंने कहा कि इन डेयरियों के माध्यम से अन्य पशु पालकों को पशुपालन के लिये प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए.पी.श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव पशुपालन श्री प्रभांशु कमल, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव कुटीर एवं ग्रामोद्योग श्रीमती वीरा राणा, प्रमुख सचिव मत्स्य-पालन श्री अरूण तिवारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शहरी सेवाएँ और जिला मार्गों के उन्नयन को मिलेंगे 5,544 करोड़

शहरी सेवाएँ और जिला मार्गों के उन्नयन को मिलेंगे 5,544 करोड़

मुख्यमंत्री श्री चौहान से मिले एशियाई विकास बैंक के उपाध्यक्ष श्री झांग

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से एशियन विकास बैंक के उपाध्यक्ष श्री डब्लू. झांग के नेतृत्व में बैंक का प्रतिनिधि-मंडल मिला। इस दौरान प्रदेश में बैंक के वित्तीय सहयोग से संचालित योजना और भविष्य में पारस्परिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गयी। बताया गया कि शहरी सेवाओं के उन्नयन के लिये 4,920 करोड़ और जिला मुख्य मार्ग उन्नयन कार्यक्रम के लिये 3000 करोड़ सहित कुल 7,920 करोड़ की दो परियोजना में बैंक द्वारा 5,544 करोड़ वित्तीय सहयोग का प्रस्ताव स्वीकृति के अंतिम चरण में है। साथ ही 4,888 करोड़ की दो अन्य परियोजना में बैंक द्वारा 3 हजार 421 करोड़ के वित्तीय सहयोग की कार्रवाई भी प्रगतिरत है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रतिनिधि-मंडल को राज्य के विकास के रोड मेप की जानकारी दी। उन्होंने विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए बताया कि आगामी 5 साल में कृषकों की आय को दोगुना करने की दिशा में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल परिवर्तन, खाद्य प्र-संस्करण के साथ ही फल-फूल, सब्जी और कृषि से जुड़े अन्य कार्यों एवं व्यवसायों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जैविक खेती का रकबा बढ़ाने और वन संरक्षण और संवर्धन के काम भी किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश वन उत्पादों का भी बड़ा उत्पादक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार माँगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाना चाहती है। लघु एवं कुटीर उद्योगों का जाल बिछाने के साथ ‘पर-ड्राप मोर-क्राप’ की अवधारणा पर कार्य करते हुए हर खेत को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पर्यटन उद्योग को मजबूत बनाकर रोजगार के नये अवसर निर्मित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

श्री चौहान ने बताया कि सामाजिक क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने और ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भौतिक प्रगति के साथ ही आध्यात्मिक प्रगति और जनता के जीवन में आनंद एवं प्रसन्नता बढ़ाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में है। उन्होंने बताया कि सरकार वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति भी सजग है। हरियाली महोत्सव की जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के दौरान प्रति व्यक्ति एक पौध रोपण का कार्य किया जाता है। नर्मदा शुद्धिकरण, नदी- जोड़ो योजना की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के जिन क्षेत्रों में जल-आधिक्य है उसे जल-अभाव वाले क्षेत्रों में पहुँचाने की परियोजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के बुनियादी ढाँचे को विकसित करने में बैंक द्वारा किये जा रहे सहयोग के प्रति आभार ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षमता सुधार, विद्युत पारेषण और वितरण सुधार योजनाओं में बैंक के वित्तीय सहयोग से प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में सर-प्लस-स्टेट बन गया है। प्रदेश में 24×7 विद्युत आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि दस वर्ष पूर्व सरकार ने बुनियादी ढाँचे को मजबूत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसके सुफल मिलने लगे हैं। राज्य की विकास दर लगातार 8 वर्ष से डबल डिजिट में है। कृषि विकास दर पिछले चार साल से 20 प्रतिशत से अधिक रही है।

एशियन विकास बैंक के उपाध्यक्ष श्री झांग ने कहा कि प्रदेश की उनकी यह प्रथम यात्रा है। उन्होंने बैंक द्वारा प्रदेश के विकास की परियोजनाओं और पर्यावरणीय चुनौतियों में सहयोग करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि, व्यावसायिक शिक्षा और तकनीकी सहायता के क्षेत्र में भी बैंक पारस्परिक सहयोग कर सकता है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में उर्जा और सड़क के क्षेत्र में 6,561 करोड़ की योजनाएँ बैंक के सहयोग से संचालित हैं। इसके साथ ही लगभग 4,888 करोड़ की दो परियोजना कुण्‍डालिया वृहद सिंचाई और मध्यप्रदेश कौशल शिक्षा एवं गुणवत्ता सुधार में 3,421 करोड़ से अधिक के वित्तीय सहयोग प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है।

इस अवसर पर एशियन विकास बैंक के डिप्टी कन्ट्री डायरेक्टर श्री एल.बी. सोंडज़ा, उपाध्यक्ष के सलाहकार श्री ह्यूविंग ह्आंग, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के.मिश्रा, सचिव श्री हरिरंजन राव और आयुक्त संस्थागत वित्त श्री अमित राठौर सहित प्रतिनिधि-मंडल के सदस्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

नि:शक्तजनों को सरकार हरसंभव सहायता देगी

नि:शक्तजनों को सरकार हरसंभव सहायता देगी
बैतूल जिले के विकास के लिये 588 करोड़ के विकास कार्य की घोषणा
मुख्यमंत्री श्री चौहान बैतूल में नि:शक्त सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल हुए

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नि:शक्तजन अपने को कमजोर न समझें, आत्म-विश्वास के साथ जीवन की शुरुआत करें। सरकार उन्हें हरसंभव सहायता देगी। श्री चौहान आज बैतूल में नि:शक्त सामूहिक विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बैतूल जिले के विकास के लिये 588 करोड़ से अधिक के विकास कार्य की घोषणा की। इस मौके पर लोक निर्माण मंत्री श्री सरताज सिंह, सांसद श्रीमती ज्योति धुर्वे और विधायक सर्वश्री हेमंत खण्डेलवाल, चेतराम मानेकर, महेन्द्र सिंह चौहान और चन्द्रशेखर देशमुख उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नि:शक्तजन को ईश्वर ने कई योग्यताएँ दी हैं। वे अपना स्वयं का रोजगार या व्यवसाय स्थापित करें। सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि नि:शक्त जोड़ों को मुख्यमंत्री आवास योजना में आवास पट्टा और आवास उपलब्ध करवाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने नि:शक्तजन सामूहिक विवाह सम्मेलन में 51 नि:शक्त जोड़ों को 50 हजार, एक लाख की सहायता और कन्यादान योजना में 25 हजार राशि के स्वीकृति-पत्र प्रदान किये। उन्होंने दीनदयाल उपचार योजना, विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र, बीपीएल, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना और आवास निर्माण के दस्तावेज नि:शक्त जोड़ों को वितरित किये। उन्होंने दान-दाताओं द्वारा प्रत्येक जोड़े को 11 हजार रुपये के साथ दी गयी अन्य सामग्री भी वितरित की। विवाह-स्थल पर ब्लाइंड स्टिक, बैसाखी और व्हील-चेयर भी दी गयी। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में नि:शक्तजन दूल्हों की बारात का द्वारचार कर स्वागत किया। उन्होंने स्वागत गीत गाने वाली बालिकाओं को 11 हजार की प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की।

बैतूल के विकास के लिये की कई घोषणा

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैतूल नगर के विकास के लिये 588 करोड़ 74 लाख की घोषणाएँ भी कीं। उन्होंने पेयजल के लिये 38 करोड़ 74 लाख, गरीबों के मकान के लिये 30 करोड़, नगरपालिका के लिये 18 करोड़, सिंचाई परियोजना पारस डोह बाँध के लिये 500 करोड़ और स्टॉप-डेम के लिये 2 करोड़ देने की घोषणा की। श्री चौहान ने बैतूल में जन-सहयोग से चलाये गये स्वच्छता अभियान की भी सराहना की।

श्रीजी उद्योग का उदघाटन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैतूल जिले के औद्योगिक क्षेत्र कोसमी में श्रीजी उद्योग का उदघाटन किया। इस इकाई में गन्ना, सोयाबीन और तुअर आदि से निकले अनुपयोगी अवशिष्ट से पार्टिकल बोर्ड का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि इस उद्योग की स्थापना से कृषि अवशिष्ट एवं वनोपज से बेहतर उत्पादन होगा। साथ ही स्थानीय आदिवासी और श्रमिकों को रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी बहुल जिले बैतूल को औद्योगिक गतिशीलता भी मिल सकेगी।

वीर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा का अनावरण

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैतूल नगर के कारगिल चौक पर राष्ट्र-वीर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि स्व. श्री राठौर का देश-हित में योगदान अविस्मरणीय है।

अब अच्छे दीन सस्ते पंखे देगी सरकार. दो साल की किस्तों में

अब अच्छे दीन सस्ते पंखे देगी सरकार. दो साल की किस्तों में

बिजली की खपत कम के उद्देश्य से एलईडी बल्ब की तरह सरकार अब कम बिजली खर्च करने वाले पंखों का भी वितरण करेगी। पंखों के वितरण का यह काम आगामी अप्रैल से शुरू होगा और मात्र 60 रुपये देकर कोई भी व्यक्ति पंखे की खरीदारी कर पाएगा।

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के माध्यम से पंखों का वितरण किया जाएगा। फिलहाल 3-4 करोड़ पंखों का वितरण करने का लक्ष्य रखा गया है। एलईडी की तरह राज्य सरकार पंखों की खरीदारी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) से करेगी और फिर राज्यों की डिस्कॉम के माध्यम से उपभोक्ता पंखों की खरीदारी कर पाएंगे।बुधवार को बिजली, कोयला नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि एलईडी के बाद उन्होंने बिजली की कम खपत करने वाले पंखों का वितरण करने की योजना बनाई है जिसे जल्द शुरू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस काम की जिम्मेदारी भी ईईएसएल को दी गई है। ईईएसएल के प्रबंध निदेशक सौरभ कुमार ने बताया डिस्कॉम के माध्यम से फाइव स्टार रेटिंग वाले पंखों का वितरण किया जाएगा जिसकी कीमत बाजार में 1800-1900 रुपये प्रति पंखा है। लेकिन खुली बोली के माध्यम से पंखे की खरीदारी करने पर ईईएसएल ने मात्र 950 रुपये में फाइव स्टार रेटिंग वाले पंखे की खरीदारी की है। इस वजह से बाजार के मुकाबले पंखे की कीमत आधी हो गई। दो साल की किस्तों में चुका सकेंगे कीमत उन्होंने बताया कि पंखे की कीमत उपभोक्ता किस्तों में चुका सकते हैं। मात्र 60 रुपये देकर उपभोक्ता पंखा ले पाएगा और बाकी की रकम का भुगतान करने के लिए उसे दो साल दिए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि एलईडी बल्ब की तरह डिस्कॉम के माध्यम से पंखों के वितरण का यह काम अप्रैल के पहले सप्ताह में आरंभ हो जाएगा। आंध्र प्रदेश से यह काम शुरू किया जा रहा है और दिल्ली, राजस्थान व महाराष्ट्र सरकार भी पंखों की वितरण योजना में शामिल होने के लिए हामी भर दी है।

कुमार ने बताया कि फाइव स्टार रेटिंग वाले पंखे के इस्तेमाल से 70-80 रुपये कीमत के बराबर की बिजली की बचत होगी। ईईएसएल के मुताबिक उनका उद्देश्य टेंडर के माध्यम से खरीदारी करके उपभोक्ताओं को सस्ता सामान देना है। ईईएसएल के जरिए विभिन्न राज्यों ने अब तक 7 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब का वितरण किया है

सब की बल्ले बल्ले,व्हाट्सएप को टक्‍कर देगा ये एप, बिना इंटरनेट करें चैट, वीडियो कॉल

सब की बल्ले बल्ले,व्हाट्सएप को टक्‍कर देगा ये एप, बिना इंटरनेट करें चैट, वीडियो कॉल
,व्हाट्सएप की लोकप्रियता से प्रभावित होकर बद्दी यूनिवर्सिटी ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की यूनिवर्सिटी के छात्रों ने व्हाट्सएप जैसे पॉपुलर एंड्रॉयड एप्लीकेशन को टक्कर देने वाला कॉइन नाम से बद्दी (सोलन)एक एंड्रॉयड एप्लीकेशन लांच किया है। इसकी खूबी यह है कि इसको चलाने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। बिना इंटरनेट के भी इस एप के माध्यम से चैट कर सकेंगे।

ऑडियो और वीडियो कॉल भी कर सकेंगे। एप बनाने वाले डॉ. अजय गोयल ने बताया कि इंटरा नेटवर्क के माध्यम से यह सुविधा चालू होगी। यूनिवर्सिटी में लगे सर्वर और अन्य राउटर के माध्यम से इसे ऑपरेट करेंगे। यूनिवर्सिटी मे मौजूद सभी लोग इस एप के माध्यम से कनेक्ट हो सकेंगे और निशुल्क आपस में चैट तथा कॉल कर सकेंगे। .. जल्द कामर्शियल इस्तेमाल के लिए लांच किया जाएगा। डॉ. गोयल ने कहा कि डिजिटल इंडिया मिशन के लिए यह एप कारगर साबित होगा। यह एप लैपटॉप से लैपटॉप और मोबाइल टू मोबाइल चैट के लिए उपयोगी साबित होगा। यूनिवर्सिटी में इस एप की लांचिंग कुलाधिपति प्रदीप श्रीवास्तव ने की है।

उनके साथ यूनिवर्सिटी के सेक्रेटरी गवर्निंग बॉडी गौरव झुनझुनवाला, वीसी डॉ. शक्ति कुमार मौजूद रहे। ये रहे टीम में शामिल: इस एप को बनाने में टीम प्रभारी डॉ. अजय गोयल, अमन कौशिक, अनूप, चिराग और अंकित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टीम ने करीब छह महीनों तक इस प्रोजेक्ट पर काम किया [मीडिया रिपोर्ट]

आत्महत्याओं के मामले प्रदेश छठवें स्थान पर

आत्महत्याओं के मामले प्रदेश छठवें स्थान पर
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भोपाल । राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए कार्यवाहक विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा लेकिन बाद में उसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंकड़ेबाजी के साथ-साथ प्रदेश के कई मामलों में नम्बर होने के जो आंकड़े दिये लेकिन उन प्रगति के आंकड़ों के साथ-साथ उन्होंने सदन में यह जानकारी देना उचित नहीं समझा कि जहां मध्यप्रदेश में चल रही कई योजनाओं में नम्बर वन के स्तर पर है तो वहीं प्रदेश में बलात्कार की घटनायें किसानों द्वारा आत्महत्या करने के मामले और नाबालिगों के साथ आये दिन हो रहे बलात्कार, राजधानी से लेकर दूरदराज के क्षेत्र में आये दिन घट रही चैन खींचने की घटनाएं और लूट व डकैती की घटनाओं के साथ-साथ करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद भी प्रदेश से कुपोषण का कलंक यह सरकार नहीं धो पाई तो वहीं सरकारी योजनाओं और अव्यवस्थाओं के चलते प्रदेश में ४२ प्रतिशत बच्चे बौने हो रहे हैं कुल मिलाकर उन्होंने जो प्रगति के आंकड़े सदन में प्रस्तुत करके अपनी पीठ थपथपाने का काम किया वह तो सभी राजनीतिक दलों के नेता करते हैं लेकिन उन आंकड़ों के बाद भी प्रदेश की स्थिति यह है कि कई मामलों में नम्बर वन है तो वहीं देश के आत्महत्याओं के मामले में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती जा रही है, इस तरह का खुलासा किसी विपक्षी दल या नेता द्वारा नहीं बल्कि एनसीआरबी २०१४ के रिकार्ड के अनुसार प्रदेश में नौ हजार ३९ आत्महत्याओं के साथ प्रदेश आत्महत्याओं के मामले में छठवें पायदान पर है कुल आत्महत्याओं में इसका प्रतिशत ६.९ है, आत्महत्याओं के मामले में सबसे अधिक संख्या महाराष्ट्र की है तो वहीं सबसे कम नागालैण्ड में सिर्फ ६१ आत्महत्याओं के मामले सामने आए हैं। मजे की बात यह है कि एनसीआरबी ने जो आंकड़े प्रस्तुत किये वह आंकड़े भी २००४ और २००५ यानि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सत्ता में काबिज होने के वर्ष से इस रिपोर्ट में खुलासा किया, इन वर्षों में आत्महत्या करने वालों की संख्या में लगभग सात प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। तो वहीं इसी क्रम में वर्ष २०१४ के आंकड़े पर गौर करें, तो प्रदेश में लगभग दो हजार गृहणियों ने आत्महत्या की है। इसके पीछे कई कारण बताये गये हैं, जैसे पारिवारिक वातावरण, पारिवारिक पृष्ठभूमि, पिछला मनोरोग का इतिहास, घरेलू हिंसा, स्वास्थ्य, दहेज उत्पीडऩ, वैवाहिक जीवन से असंतुष्ट, अवसाद, पुरुष प्रधान समाज द्वारा कलंक आदि आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। जबकि कामकाजी महिलाएं आत्महत्या करने में पुरुषों की अपेक्षा कम हैं। इस वर्ष जहां ४२८ कामकाजी पुरुषों ने आत्महत्या की, तो ८१ महिलाओं ने अपना जी वन समाप्त करने का निर्णय लिया। आत्महत्या के मामले में छात्रों की स्थिति भी भयावह है। लड़कों की अपेक्षा लड़कियों ने इस वर्श अधिक आत्महत्या की है, उनकी संख्या जहां ३४५ है, वहीं लड़कों की संख्या ३०० है। आत्महत्या के पीछे बेरोजगारी भी एक बड़ी वजह रही है। २०१४ में कुल ३३३ बेरोजगारों ने आत्महत्या की है, इनमें महिलाओं की संख्या ५० है। सबसे अधिक निजी व्यवसाय, कृषक और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों वाले लोगों ने आत्महत्या की है। इनकी संख्या एक हजार, ८८५ है। इनमें महिलाओं की संख्या ३३६ है। जानकार बताते हैं कि लगातार पिछले दो-तीन वर्षों में किसानों द्वारा आत्महत्या की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। फसल नष्ट होने और बढ़ती कर्ज और अन्य विकल्प न होना आत्महत्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। सरकार की ओर से मिलने वाला राहत पैकेज भी इनकी जान नहीं बचा पा रही है। इसके पीछे भ्रष्टाचार बहुत बड़ी वजह है। वहीं दैनिक वेतन भोगी एक हजार २४८ आत्महत्या करने वालों में महिलाओं की संख्या १४२ है। इसी तरह सेवा निवृत्त के बाद कुल १८ आत्महत्या करने वालों में से महिलाओं की संख्या पांच है। अगर अन्य पर गौर करें, तो दो हजार २२७ आत्महत्याओं में महिलाओं की संख्या ५६५ है।

मुख्यमंत्री द्वारा उज्जैन में 363 करोड़ से अधिक लागत के पेयजल, सड़क और पुल का लोकार्पण

मुख्यमंत्री द्वारा उज्जैन में 363 करोड़ से अधिक लागत के पेयजल, सड़क और पुल का लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज उज्जैन में सिंहस्थ-2016 के निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने 363 करोड़ 49 लाख की लागत के पेयजल कार्य, सड़क, पुल का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने चक्रतीर्थ पर चार पुल और दो सड़क के साथ ही रामघाट से दत्त अखाड़े को जोड़ने वाले रपटा के नवीनीकरण और मंगलनाथ फोर लेन पर सेन्ट्रल लाइटिंग का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर मंगलनाथ से कमेड़ मार्ग पीलिया खाल नाले पर 5 करोड़ 57 लाख की लागत से बने पुल का उदघाटन किया। पुल के निर्माण से आगर एवं मक्सी से आने वाले यात्रियों को सुविधा होगी। साथ ही 9 करोड़ 81 लाख की लागत के ओखलेश्वर घाट से विक्रान्त भैरव मन्दिर को जोड़ने क्षिप्रा नदी पर नव-निर्मित पुल, बड़े पुल के पास क्षिप्रा सेतु के समानान्तर 8 करोड़ 51 लाख की लागत से चक्रतीर्थ के समीप निर्मित अतिरिक्त पुल तथा ऋणमुक्तेश्वर से रणजीत हनुमान मार्ग के मध्य क्षिप्रा पर नव-निर्मित पुल का भी श्री चौहान ने लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने करीब 5 करोड़ की लागत से निर्मित रामघाट से मुल्लापुरा फोर-लेन रोड एवं 19 करोड़ 26 लाख की लागत से बनी मकोड़िया आम खाकचौक से मंगलनाथ फोर-लेन सी.सी. रोड मय सेन्ट्रल लाइटिंग तथा 32 लाख की लागत से रामघाट से दत्त अखाड़े को जोड़ने वाले नये रपटा का उदघाटन किया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकार्पण से पूर्व क्षिप्रा के सुनहरी घाट पर त्रिवेणी के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री ने क्षिप्रा किनारे पहुँचकर नदी का अवलोकन भी किया।

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मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गऊघाट जल यंत्रालय पर सिंहस्थ-2016 में पेयजल व्यवस्था के लिये 41 करोड़ 89 लाख की लागत के बारह कार्य लोकार्पित किये। इससे उज्जैन शहर में प्रदाय किये जाने वाले जल की जल-शोधन क्षमता दुगनी हो गई है। सिंहस्थ के दौरान 161 एमएलडी प्रतिदिन जल वितरण की क्षमता विकसित हो गयी है। उल्लेखनीय है कि 11 करोड़ की लागत से गऊघाट जल-शोधन संयंत्र से त्रिवेणी तक 500 एवं 150 मिमी व्यास डीआई पाइप लाइन बिछाई गई है। इससे सिंहस्थ के बाद भी शहर के लिये नर्मदा-क्षिप्रा लिंक के पानी का उपयोग किया जा सकेगा और भविष्य में कभी जल संकट नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने 6 करोड़ 17 लाख रूपये के वरूणालय जल-शोधन संयंत्र एवं सम्बन्धित अवयव का निर्माण, गऊघाट जल यंत्रालय से गुदरी स्थित उच्च-स्तरीय पानी की टंकी तक 500 मिमी व्यास डीआई पाइप लाइन बिछाने के लिये 1 करोड़ 74 लाख के कार्य, 4 करोड़ लागत के जल-शोधन संयंत्रों एवं पम्पिंग स्टेशन के उन्नयन कार्य का उदघाटन किया। उन्होंने 5 करोड़ 40 लाख की लागत से आठ एमएलडी जल्पेश्वर जल-शोधन संयंत्र, 74 लाख 90 हजार रूपये की लागत से गढ़कालिका क्षेत्र में उच्च-स्तरीय पानी की टंकी का निर्माण, एक करोड़ 57 लाख रूपये की लागत से वरूणालय जल-शोधन संयंत्र से चिन्तामन गणेश तक पाइप लाइन बिछाने का कार्य एवं 150 किलो लीटर क्षमता की 15 मीटर ऊँचाई की उच्च-स्तरीय पानी की टंकी का निर्माण और पौने दो करोड़ की लागत से उंडासा पर वर्तमान जल-शोधन संयंत्र के उन्नयन कार्य का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने मंगलनाथ सिंहस्थ मेला क्षेत्र में करीब 2 करोड़ की लागत से 600 किलो लीटर क्षमता की उच्च-स्तरीय टंकी का निर्माण और 300 मिमी व्यास डीआई पाइप लाइन बिछाने का कार्य, उजड़खेड़ा बड़नगर रोड मेला क्षेत्र में 81 लाख की लागत से 250 किलो लीटर क्षमता की उच्च-स्तरीय पानी की टंकी का निर्माण एवं 2500 एमएम पाइप लाइन बिछाने का कार्य, 11 करोड़ की लागत से गऊघाट जल-शोधन संयंत्र से त्रिवेणी तक 500 एवं 150 मिमी व्यास डीआई पाइप लाइन बिछाने का कार्य, 4 करोड़ 36 लाख की लागत से गंभीर नदी पर 12 मीटर व्यास और 20.50 मीटर गहराई के इंटेक वेल का निर्माण तथा सिंहस्थ मेला क्षेत्र में भैरवगढ़ टंकी के पास 885 किलो लीटर क्षमता के सम्पवेल, पम्प हाऊस एवं सब-स्टेशन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने जल-शोधन संयंत्र का अवलोकन भी किया।

जयसिंह पुरा बदल मार्ग लोकार्पित

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उज्जैन में चिंतामन गणेश मार्ग पर 39 करोड़ 18 लाख की लागत से निर्मित जयसिंह पुरा बदल मार्ग को लोकार्पित किया। इस ब्रिज की लम्बाई 1234.45 मीटर तथा चौड़ाई 12 मीटर है। इस मौके पर प्रभारी मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, सांसद डॉ. चिन्तामणि मालवीय, सिंहस्थ केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष श्री माखन सिंह, विधायक डॉ. मोहन यादव और श्री अनिल फिरोजिया उपस्थित थे।

TAMIL NADU TOURISM

A great voyage between the vast mountains and the colourful sky. It Seems like someone has thrown a bucket of plenty of colours in it. The freshness, the smell of nature, flowers and melodious water flows from the mountain. It doesn’t feel like it is real… each morning feels like a dream voyage. Human activities with crops, the organic food and the romantic rain… I’m sure you won’t miss it after discovering Ooty through my images