जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल द्वारा रीवा मेडिकल कॉलेज का अतिथि गृह लोकार्पित

जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल द्वारा रीवा मेडिकल कॉलेज का अतिथि गृह लोकार्पित
जनसंपर्क, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा खनिज साधन मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने शुक्रवार को श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के पुनर्सुसज्जित अतिथि गृह का शुभारंभ किया। उन्होंने नवनिर्मित लेबर रूम का लोकार्पण भी किया। श्री शुक्ल ने सेप्टिक वार्ड तथा पोस्ट नेटल वार्ड का भी शुभारंभ किया।

श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिले। उन्होंने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल की सुविधा भी शीघ्र ही रीवा के नागरिकों को मिलेगी। जी.एम.एच. रीवा का बाहरी लुक भी अच्छा करने के साथ प्रतीक्षालय भी बनाया जाएगा।

टी.आर.एस कॉलेज के निर्माण कार्यों का लोकार्पण

श्री राजेन्द्र शुक्ल ने शासकीय ठाकुर रणमत सिंह (दरबार) महाविद्यालय में मुख्य प्रवेश द्वार, स्पोर्ट काम्पलेक्स और मेजर ध्यानचंद हाकी स्टेडियम सहित 15 निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। श्री शुक्ल ने महाविद्यालय में हुए बदलाव तथा ई-लाइब्रेरी की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि महाविद्यालय के कायाकल्प से पढ़ाई का वातावरण बनेगा। उन्होंने कम्प्यूटर विज्ञान एवं भौतिकी परिषद द्वारा प्रकाशित पत्रिका का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा महाकाल मंदिर में सपरिवार पूजन

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा महाकाल मंदिर में सपरिवार पूजन

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मानवता के कल्याण और सिंहस्थ महापर्व निर्विघ्न सम्पन्न होने के उद्देश्य से सपरिवार उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मन्दिर में देव-दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ महापर्व सब मिल-जुल कर मनायें। मुख्यमंत्री ने दर्शन के बाद श्री ओंकारेश्वर, श्री सिद्धिविनायक तथा साक्षी गोपाल के दर्शन भी किये।

मुख्यमंत्री ने सपरिवार महन्त श्री प्रकाशपुरी जी से आशीर्वाद प्राप्त कर प्रसादी ग्रहण की। उन्होंने महन्तश्री से कहा कि आपकी कृपा बनी रहे। महन्त श्री प्रकाशपुरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सिंहस्थ महापर्व के सफल आयोजन के लिये बहुत अच्छी व्यवस्थाएँ और विकास के बहुत काम किये हैं। महाकाल ही सिंहस्थ को निर्विघ्न सम्पन्न करवायेंगे, ऐसी ईश्वर से कामना है। महन्तश्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे 18 अप्रैल को महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में समय निकालकर अवश्य आयें। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ प्रभारी मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, विधायक श्री सतीश मालवीय, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने आव्हान अखाड़े के भवन को कर-मुक्त करवाने की घोषणा की

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अखाड़ा-स्थल पहुँच कर सन्तों से सपत्नीक आशीर्वाद लिया

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन के ग्राम सदावल स्थित श्री पंचदशनाम आव्हान अखाड़ा के नव-निर्मित भवन को नगर निगम कर से मुक्त करवाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री से अखाड़े के साधु-समाज ने नव-निर्मित भवन को टेक्स मुक्त करवाने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने आग्रह को स्वीकार करते हुए मौके पर ही भवन को कर-मुक्त करवाने की घोषणा की। इस पर साधु-समाज ने हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को तहेदिल से आशीर्वाद दिया। इसके पूर्व साधु-सन्तों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पहारों से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर आव्‍हान अखाड़े के सभापति श्रीमहन्त अमर शब्दानंदपुरी, महामंत्री सत्यगिरि, महन्त जय-विजय भारती सहित बड़ी संख्या में सन्त और महन्त उपस्थित थे।

आव्हान अखाड़े के बाद मुख्यमंत्री श्री पंच अग्नि अखाड़ा स्थल पहुँचे, जहाँ सन्त-समाज ने अखाड़े में अब तक हुए विकास व निर्माण कार्यों के लिये मुख्यमंत्री को साधुवाद दिया। इस दौरान अग्नि अखाड़े के सभापति श्रीमहन्त ब्रह्मचारी गोपालानंद, महामंत्री गोविंदानंद ब्रह्मचारी, श्रीमहन्त लालबाबा, स्वामी मुक्तानंद सहित काफी संख्या में अखाड़े के साधु-सन्त उपस्थित थे। श्री चौहान ने दोनों अखाड़ों के सन्त-महन्त एवं साधुओं से सपत्नीक आशीर्वाद प्राप्त किया। अखाड़ों के भ्रमण के दौरान प्रभारी मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह, अखिल भारती अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री नरेन्द्रगिरि और अधिकारी मौजूद थे।

कानून के राज की स्थापना और जनता को न्याय दिलाने में न्यायपालिका की अहम भूमिका – राष्ट्रपति श्री मुखर्जी

कानून के राज की स्थापना और जनता को न्याय दिलाने में न्यायपालिका की अहम भूमिका – राष्ट्रपति श्री मुखर्जी
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि कानून का राज स्थापित करने में तथा लोगों को न्याय दिलाने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि ऐसे समाज में जिसमें जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़ा है न्यायिक व्यवस्था तक आसान पहुँच अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति आज यहाँ भोपाल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की चतुर्थ रिट्रीट का शुभारंभ कर रहे थे।

राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने लोकतंत्र के तीनों स्तंभ में न्यायपालिका की भूमिका अहम है। उसकी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय दिलाने, मानव अधिकारों और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा में संरक्षक की भूमिका है। उन्होंने कहा कि लोगों के लिये न्याय सस्ता, सुलभ और त्वरित होना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान जीवंत दस्तावेज है। गरीबों में गरीब की न्याय तक पहुँच ही सबके लिये न्याय को, सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि हमारे विकासशील देश में न्यायपालिका का कार्यक्षेत्र व्यापक है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में न्यायालयों की बुनियादी सुविधाएँ बेहतर हुई हैं। ई-न्यायालय परियोजना में ऑनलाइन प्रकरणों की जानकारी मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थ-व्यवस्था को वैधानिक व्यवस्था में परिवर्तनों से बाधित नहीं होनी चाहिये। इसके लिये आवश्यक है कि न्यायपालिका और विधायिका के मध्य आपसी समझ विकसित हो।

श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि शीर्ष न्यायालय निरंतर सुशासन के लिये सफलतापूर्वक कानूनों की व्याख्या कर रहा है। इससे मानवीय सम्मान की अपेक्षाओं की भी पूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त की है। उच्च मानक और उद्दात सिद्धांतों के द्वारा न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों ने न केवल देश के वैधानिक और संवैधानिक ढाँचे को मजबूत किया है, वरन अनेक देशों को भी प्रगतिशील न्यायाधिकार क्षेत्र के लिये प्रेरित किया है। श्री मुखर्जी ने प्रधान न्यायाधीश द्वारा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिये किये जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने यह कार्यक्रम आयोजित करने के लिये भी मुख्य न्यायाधीश की सराहना की। साथ ही उम्मीद जाहिर की कि इससे वैश्विक चुनौतियों के प्रति न्यायाधीशों को जागरूक करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधि के शासन में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सर्वोच्च न्यायलय के प्रधान न्यायाधीश श्री टी.एस. ठाकुर ने रिट्रीट के आयोजन की आवश्यकताओं और महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रिट्रीट नवीन वैश्विक चुनौतियों पर न्याय पालिका का ध्यान केंद्रित करने का प्रयास है। दुनिया की आबादी का छठवाँ हिस्सा शांति एवं व्यवस्थापूर्ण जीवन व्यतीत करे, इसके लिये आवश्यक है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक परिवर्तनों को समझा जाये। उनका प्रजातांत्रिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण की चुनौतियों में, उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्ट्राचार के साथ संघर्ष में, मानवधिकारों के संरक्षण में, मानवीय कानूनों की महत्ता में, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर, वैश्विक आंतकवाद के खतरे पर, आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन तथा ग्लोबलाइजेशन पर प्रभाव को भी समझा जाये।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्री-लिटिगेशन व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाये ताकि छोटे मामलों का न्यायालय के बाहर ही निराकरण हो सके। इससे न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या कम होगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रकरणों के निराकरण की प्राथमिकता निर्धारण की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि मध्यप्रदेश में न्याय पालिका, विधायिका और कार्यपालिका के बीच दूरियाँ नहीं रहें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव चलते रहने से समय और धन की बर्बादी होती है। इसीलिये पाँच साल में एक बार में चुनाव होने चाहिये। नेता का परिवर्तन हो सकता है किन्तु सदन पाँच साल तक चलना चाहिए। उन्होंने चुनाव के लिये स्टेट फंडिंग की व्यवस्था किये जाने पर भी विचार का सुझाव दिया।

केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने कहा कि सरकार और न्यायपालिका दोनों का प्रयास है कि न्याय का अधिकतम विस्तार हो। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया के बड़े लोकतंत्र से कहीं अधिक है। यह ऐसा संवैधानिक संसदीय लोकतंत्र है जिसमें स्वतंत्र और प्रो-एक्टिव न्यायपालिका है। उन्होंने अधिकारों के प्रति नागरिकों की जागरूकता की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तीव्र आर्थिक विकास के लिये आवश्यक है कि उद्यमियों को व्यापार का सहज वातावरण उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि न्यायिक सुधारों का स्वरूप ऐसा होना चाहिये कि लोगों का न्यायिक व्यवस्था में विश्वास और अधिक मजबूत हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का उद्देश्य निवेश को बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करना और कौशल विकास का उन्नयन है। उन्होंने बताया कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया को तीव्र करने के प्रयास किये गये हैं। नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी को रिवाइज किया जा रहा है। विशेष वाणिज्यिक न्यायालय के गठन का प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी को न्याय मिले, तभी इन प्रयासों की सफलता है। समाज में शांति एवं व्यवस्था के लिये न्याय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायिक संस्थाओं के बुनियादी ढाँचों को मज़बूत बनाने के प्रयास हुए हैं। राज्यों के लिये राशि की उपलब्धता में काफी वृद्धि की गई है। वर्ष 2011 से अभी तक 13वें वित्त आयोग के तहत 1900 करोड़ रुपये से अधिक विभिन्न गतिविधियों के लिये राज्यों को आवंटित किये गये हैं। अधिकांश जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय कम्प्यूटरीकृत हो गये हैं।

पूर्व प्रधान न्यायाधिपति सर्वोच्च न्यायालय श्री एम. वेंकटचलैया ने एकेडमी की स्थापना से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिट्रीट के चिंतन के दौरान आने वाले विचार भविष्य के स्वरूप निर्धारण का आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय सम्भत: मानव इतिहास का सबसे जटिल दौर है। परस्पर अनुशासित रूप से जुड़े समाज, देश के विकास, शांति और व्यवस्था में न्यायिक संस्थाओं की भूमिका और उसको किस प्रकार से अंगीकृत किया जाये, पर विचार जरूरी है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री ए.एम. खानविलकर ने स्वागत उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि रिट्रीट न्यायाधीशों को अर्थ-व्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान और भारतीय समाज के समक्ष नई चुनौतियों पर जागरूक करेगा। उन्होंने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में संसद द्वारा बनाए गये नियमों की व्याख्या का उत्तरदायित्व न्याय पालिका का है। न्यायालय इसके माध्यम से नियमों को प्रकाशित भी करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रिट्रीट का चिंतन संविधान और कानून के राज की अक्षुण्णता में सहयोग करेगा। कानून और समाज के बीच सेतु का कार्य करेगा। आभार ज्ञापन जस्टिस जी. रघुरामन ने किया।