बीपीएल सूची में दिग्विजय सिंह और उनके परिजन का नाम नहीं

राज्य शासन ने कुछ समाचार-पत्रों में प्रकाशित सांसद श्री दिग्विजय सिंह के आरोपों को आधारहीन एवं तथ्यों से परे बताया है। समाचार-पत्रों में प्रकाशित समाचार में श्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार ने झूठे केस में फँसाने के लिए गलत तरीके से उनका नाम गरीबी रेखा की सूची में डाल दिया है। वस्तुस्थिति यह है कि राज्य की बीपीएल सूची में श्री दिग्विजय सिंह अथवा उनके परिवार के सदस्यों के नाम नहीं है।

राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उज्जवला योजना के लिए जिस सामाजिक, आर्थिक और जातिगत जनगणना (SECC) को आधार बनाया गया है, यह सर्वे वर्ष 2011 में किया गया था। सर्वे में प्रदेश के सभी नागरिकों के बारे में जानकारी संकलित की गयी थी। सर्वे में श्री दिग्विजय सिंह और उनके परिवार की जानकारी भी संकलित की गयी थी। यह उल्लेखनीय है कि सर्वे में अंकित जानकारी नागरिक द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर शामिल होती है और सर्वेकर्ता द्वारा कोई विस्तृत जाँच नहीं की जाती है।

सर्वे में संकलित जानकारी में राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (NIC) नई दिल्ली द्वारा कुछ फिल्टर लगाकर उज्जवला योजना के लिए संभावित पात्र परिवारों की प्रथम सूची तैयार कर गैस कंपनियों को दी गयी है। यह सूची नागरिकों द्वारा सर्वे के दौरान दी गयी जानकारियों के आधार पर है, परन्तु इससे उज्जवला योजना में स्वत: पात्रता नहीं आ जाती है। इस सूची में आने वाले परिवारों के द्वारा यदि उज्जवला योजना में आवेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो उसका परीक्षण गैस कंपनी द्वारा किया जायेगा। यदि ऐसे आवेदक के पास पूर्व से गैस कनेक्शन है तो उसका आवेदन निरस्त कर दिया जायेगा, भले ही उसका नाम उपरोक्त सूची में हो। इस प्रकार सिर्फ सूची में नाम होना उज्जवला योजना में लाभ के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए यह कहना निराधार है कि सूची में श्री दिग्विजय सिंह का नाम डालकर उनके विरूद्ध झूठा मुकदमा दर्ज करवाने की तैयारी की जा रही है।

यह भी स्पष्ट है कि प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के लिए प्रयुक्त की जा रही बीपीएल सूची का उज्जवला योजना की सूची से कोई संबंध नहीं है और न ही प्रदेश की बीपीएल सूची में श्री दिग्विजय सिंह अथवा उनके परिवार का नाम है।

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