सब की बल्ले बल्ले,व्हाट्सएप को टक्‍कर देगा ये एप, बिना इंटरनेट करें चैट, वीडियो कॉल

सब की बल्ले बल्ले,व्हाट्सएप को टक्‍कर देगा ये एप, बिना इंटरनेट करें चैट, वीडियो कॉल
,व्हाट्सएप की लोकप्रियता से प्रभावित होकर बद्दी यूनिवर्सिटी ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की यूनिवर्सिटी के छात्रों ने व्हाट्सएप जैसे पॉपुलर एंड्रॉयड एप्लीकेशन को टक्कर देने वाला कॉइन नाम से बद्दी (सोलन)एक एंड्रॉयड एप्लीकेशन लांच किया है। इसकी खूबी यह है कि इसको चलाने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। बिना इंटरनेट के भी इस एप के माध्यम से चैट कर सकेंगे।

ऑडियो और वीडियो कॉल भी कर सकेंगे। एप बनाने वाले डॉ. अजय गोयल ने बताया कि इंटरा नेटवर्क के माध्यम से यह सुविधा चालू होगी। यूनिवर्सिटी में लगे सर्वर और अन्य राउटर के माध्यम से इसे ऑपरेट करेंगे। यूनिवर्सिटी मे मौजूद सभी लोग इस एप के माध्यम से कनेक्ट हो सकेंगे और निशुल्क आपस में चैट तथा कॉल कर सकेंगे। .. जल्द कामर्शियल इस्तेमाल के लिए लांच किया जाएगा। डॉ. गोयल ने कहा कि डिजिटल इंडिया मिशन के लिए यह एप कारगर साबित होगा। यह एप लैपटॉप से लैपटॉप और मोबाइल टू मोबाइल चैट के लिए उपयोगी साबित होगा। यूनिवर्सिटी में इस एप की लांचिंग कुलाधिपति प्रदीप श्रीवास्तव ने की है।

उनके साथ यूनिवर्सिटी के सेक्रेटरी गवर्निंग बॉडी गौरव झुनझुनवाला, वीसी डॉ. शक्ति कुमार मौजूद रहे। ये रहे टीम में शामिल: इस एप को बनाने में टीम प्रभारी डॉ. अजय गोयल, अमन कौशिक, अनूप, चिराग और अंकित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टीम ने करीब छह महीनों तक इस प्रोजेक्ट पर काम किया [मीडिया रिपोर्ट]

आठवीं क्लास के रोनलोफ्ट्स ने दिया भारतियों को फ्रेंड्सलोफ्ट्स नामक सोशल साइट का तोहफा

गोवा के आठवीं क्लास के रोनलोफ्ट्स ने दिया भारतियों को फ्रेंड्सलोफ्ट्स नामक सोशल साइट का तोहफा

गोवा- कौन नहीं चाहेगा की उसकी भी एक ऐसी पर्सनल साइट हो जिससे वो सारी दुनिया के लोगों से कनेक्ट रह सके, उनसे अपनी हर बात शेयर कर सके! लोग फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस जैसी सोशल मीडिया वेबस्इटों पर अपना अकॉउंट बनाते हैं और ये उम्मीद करते हैं शायद कोई अच्छा सा दोस्त उनको मिल जाये, जिसके साथ वे अपनी ज़िन्दगी के कुछ स्पेशल लम्हों को शेयर कर सके! या इसलिए की दुनिया के लोगों के सामने अपने बिज़नेस को शेयर करके उसे और बढ़ावा दे सकें! या फिर इस लिए की वे जो हैं उसको दुनिया के सामने ला सकें!

फेसबुक के संस्थापक और चैयरमेन मार्क ज़ुकेरबर्ग को तो दुनिया ने बहुत खूबसूरती से जान लिया! और ये भी जान लिया की वे एक अमेरिकन हैं! मगर अब ऐसा ही कुछ ख़ास किया है भारत के एक छोटे से होनहार बच्चे ने जिसका नाम है रोनलोफ्ट्स! जी हाँ! गोवा में रहने वाले आठवीं क्लास के रोनलोफ्ट्स ने भी अपनी सोशल मीडिया साइट फ्रेंड्सलोफ्ट्स बनाई है! जिसपर हम फेसबुक की तरह ही एक दुसरे से कनेक्ट हो सकते हैं! और अपनी सूचि में फेसबुक की तरह से ही विश्व भर के लोगों से जुड़ सकते हैं!

जब हमने रोनलोफ्ट्स से बात की तो उन्होंने हमें बताया की वे चाहते थे की उनकी भी एक पर्सनल सोशल साइट हो जिसके वे संस्थापक रहें! आठवीं क्लास के रोनलोफ्ट्स ने अपने हुनर का परिचय देते हुए भारतवासियों को ही नहीं बल्कि दुनिया वालों को भी दे दिया और एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट जिसका नाम है फ्रिएंड्सलोफ्ट्स!

http://www.friendslofts.com

हम कामना करते हैं की रोन्फ़ॉल्ट्स अपने इस हुनर व् कला से भारत को भविष्य में और भी ज़्यादा मनोरंजित करते रहें!

ऐसे होनहार भारतीय को दिल से सलाम!

फ्रेंड्सलोफ्ट्स पर अपना अकाउंट बनाने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें और अपना अकाउंट बनाकर लोगों से जुड़ जाएँ!

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मोदी जी, राजनीति में विरोधी को मिटाने से नहीं, पछाड़ने से फ़ायदा होता है !

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उसे ख़बरों और उसकी चीड़फाड़ का चस्का है! चस्का भी क्या नशा है! हालाँकि, नशा कहना मुनासिब नहीं, क्योंकि नशा तो बुराई स्वरूप है, जबकि चस्का में सकारात्मकता (Positivity) है. उसका नाम है अनोखे लाल उर्फ़ ‘नाना पाटेकर’. उम्र 43 साल. निवासी – रैगरपुरा, दिल्ली. शिक्षा – छठी पास, लेकिन सातवीं फेल नहीं, क्योंकि पढ़ाई छूट गयी. पेशा – पैतृक, चर्मकार. वो शानदार जूते बनाता है. जो किसके पैर की शान बनते हैं, ये उसे नहीं मालूम. इसके बारे में जानना तो चाहता है, लेकिन जान नहीं सकता. जूते बनाने के अलावा अनोखे लाल की ख़बरों में ऐसी दिलचस्पी है कि जिसे आप जुनूनी कह सकते हैं. रोज़ाना पाँच हिन्दी के अख़बारों को चाट जाना उसका शग़ल है. ख़बरों का वो ऐसा विश्लेषण करता है कि धुरन्धर सम्पादक भी उसके आगे पानी भरेंगे. यादाश्त भी ऐसी गज़ब की है कि बड़े-बड़े नेता, प्रवक्ता, अफ़सर और टीवी विशेषज्ञ भी उसके आगे पनाह माँगे. धाराप्रवाह बोलने का ऐसा अचूक कौशल कि ‘नाना पाटेकर’ भी उसके आगे सिर झुका लें. बोलने का अन्दाज़ भी ‘नाना पाटेकर’ से मिलता-जुलता है. वाणी में अद्भुत ओज है. इसीलिए सहकर्मी उसे प्यार और आदर से ‘नाना पाटेकर’ कहने लगे. किसी ने मुझे अनोखे लाल के बारे में बताया. तो मेरा कौतूहल बेक़ाबू हो गया. मैं चला गया, उससे मिलने. क्या मुलाक़ात थी वो! क़रीब पौन घंटा चली. इसमें से शिष्टाचारी परिचयबाज़ी के 4-5 मिनट को छोड़ दें तो बाक़ी 40 मिनट तक मैं आवाक् ही रहा. शायद, उस दौरान मेरी पलकें भी नहीं झपकीं. बातचीत में एक जगह अनोखे ने कहा, ‘देश ने मोदी को इसलिए तो प्रधानमंत्री बनाया नहीं था कि वो काँग्रेस का समूल नाश करने का वैसा ही संकल्प पूरा करने लगें, जैसे विश्वामित्र ने पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करने की ठानी थी. मोदी को देश ने ‘अच्छे दिन’ लाने के लिए वोट दिया था. लेकिन सरकार बनाने के बाद वो सोनिया गाँधी को इटली या जेल भेजने के अभियान में जुट गये.’ मैंने कहा, ‘भाई अनोखे, ऐसा क्या कर दिया मोदी जी ने?’ कहने लगा, ‘आप तो पत्रकार हैं. आपको क्या लगता है कि इटलियन नाविकों की रिहाई के लिए वहाँ की सरकार भी सीबीआई की तरह तोता बन जाएगी! वो सबूत देने लगेगी कि आगस्टा हेलिकॉप्टर सौदे में सोनिया गाँधी ने दलाली ख़ायी थी!’ मैंने कहा, ‘आपको क्या समझ में आ रहा है?’ अनोखे बोला, ‘मोदी जी का तो वही हाल है कि चले थे हरि भजन को ओटन लगे कपास!’ मैंने विषयान्तर किया. पूछा, ‘आपने मोदी को वोट दिया था क्या?’ अनोखे लाल ने कहा, ‘बिल्कुल दिया था. कमल का बटन दबाया था. उदित राज को जिताया था. लेकिन सरकार बनते ही मोदी जी ज़ुमलेबाज़ी में जुट गये. तब लगा, गड़बड़ हो गया. इसीलिए दिल्ली में झाड़ू को वोट दिया.’ मैंने पूछा, ‘परिवार में कौन-कौन है?’ बोला, ‘विधवा माँ, पत्नी और दो-बेटे. बड़ा वाला दसवीं में है और छोटा वाला सातवीं में. अब तो दोनों मुझसे ज़्यादा पढ़ लिये. सरकारी स्कूल में पढ़ाता हूँ. वहाँ कुछ होता नहीं. इसलिए नीता मैडम के पास दोनों ट्यूशन भी पढ़ने जाते हैं. मैडम कोई फ़ीस नहीं लेतीं. मुफ़्त पढ़ाती हैं. कभी दो घंटा. कभी उससे भी ज़्यादा. मैडम की कृपा से दोनों पढ़ने में बहुत अच्छे हैं. मेरी अँग्रेज़ी सफ़ाचट है. लेकिन बेटों की शानदार है. नसीब ने साथ दिया तो बेटे बड़े आदमी बन जाएँगे!’ अभी अनोखे रुका नहीं. आगे बोला, ‘पत्नी गृहिणी है. सास-बहू, घर में रहती हैं. पत्नी ख़ाली वक़्त में साड़ी में फ़ॉल लगा लेती है. लेकिन उनका असली काम है, घर चलाना! इससे फ़ुर्सत हो तभी अतिरिक्त आमदनी की गुंज़ाइश है. वर्ना ख़बरदार, जो पैसे की पीछे भागने की कोशिश की. मैं 12 घंटे काम करता हूँ. इतना कमा लेता हूँ कि गृहस्थी ठीक से चल सके. झुग्गी बस्ती में डेढ़ कमरे का घर है. सभी ज़रूरी चीज़ें हैं. टीवी है. गैस है. फ्रिज़ है. मुझे कोई व्यसन नहीं. बीड़ी-सिगरेट, शराब, कुछ भी नहीं. कोई नशा नहीं. लेकिन हाँ, ये अख़बार चाटना भी किसी नशे से कम नहीं. पाँच अख़बार ख़रीदता हूँ. उन्हें पढ़ता हूँ. जमकर काम करता हूँ. ख़ुश रहता हूँ. यही शौक़ है, यही लत और यही आदत भी!’ वाणी की ऐसी सरलता. बिना पूछे ही सब कुछ कह देने की समझ और धाराप्रवाह बातचीत में भी सटीक शब्दों का चयन. अब तक मैं सम्मोहित हो चुका था. थोड़ा निरुत्तर भी. बतौर पेशेवर पत्रकार तमाम नामचीन हस्तियों से मिलने का सौभाग्य मिलता रहा. किससे-किससे, कब-कब और कैसे-कैसे सवाल पूछे? इसका संस्मरण लिखूँ तो शायद ‘बेस्ट सेलर’ बन जाए. लेकिन अनोखे के साथ बतियाने का अनुभव अनोखा था. अद्भुत, अविस्मरणीय और अलौकिक भी! मैंने फिर विषयान्तर करके पिछली बात का रुख़ किया. पूछा, ‘क्या आपको नहीं लगता कि सोनिया गाँधी का ‘हिसाब’ करने की मंशा का जो आरोप नरेन्द्र मोदी पर मढ़ा गया है, उसमें शरारत है?’ अब तो अनोखे का रंग और तेवर ही बदल गया! कहने लगा, ‘देखिए सर, मुझे न सोनिया की बदौलत रोटी मिलती है और न नरेन्द्र मोदी मेरे घर राशन भिजवाते हैं! दिन भर मेहनत करता हूँ तो शाम को रोटी मिलती है. लेकिन इतना तो दावे के साथ कह सकता हूँ कि इटली से सोनिया के ख़िलाफ़ सबूत माँगने की ख़बर झूठी नहीं हो सकती!’ मैंने पूछा, ‘वो कैसे?’ जवाब में अनोखे लाल ने ख़ुद ही प्रश्नोत्तर शैली को अपना लिया. बोला, ‘आरोप लगाने वाला कौन है? 54 वर्षीय ब्रिटिश आर्म्स एजेंट क्रिश्चियन मिशेल. आरोप कहाँ और कैसे लगाया? ‘इंटरनैशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सीज’ और ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ को पत्र लिखकर. पत्र क्यों लिखा? क्योंकि उसकी इटालियन कम्पनी फिनमेक्कानिका की ब्रिटेन स्थित सहायक फ़र्म को 2010 में 3,727 करोड़ रुपये में 12 आगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टरों की सप्लाई का सौदा मिला था. इसका इस्तेमाल वीवीआईपी के लिए होना था.’ अनोखे ने आगे कहा, ‘हेलिकॉप्टर सौदे में 375 करोड़ रुपये की दलाली के आरोप लगे तो मनमोहन सरकार के रक्षा मंत्री ए के एंटोनी ने सौदा रद्द कर दिया. इस सौदे में सप्लाई हुए तीन हेलिकॉप्टर भी भारत ने ज़ब्त कर लिये. क़ानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी. इसमें ब्रिटिश एजेंट क्रिश्चियन मिशेल की भारतीय जाँच एजेंसियों को तलाश है. मामला अभी आर्बिट्रेशन में है. मोदी को लगता है कि ये दलाली सोनिया गाँधी ने खायी है. लेकिन उन्हें सबूत मिले. क्रिश्चियन मिशेल का आरोप है कि सितम्बर 2015 में न्यूयॉर्क में हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान नरेन्द्र मोदी और इटली के प्रधानमंत्री मैटेयो रेंजी के बीच हुई मुलाकात में इटालियन नाविकों की रिहाई के बदले गाँधी परिवार के ख़िलाफ़ दलाली के सबूत के नाम पर सौदेबाज़ी हुई.’ अनोखे की बात अब भी अधूरी थी. उसने आगे कहा, ‘अब ये भी बताऊँ कि ये इटालियन नाविक वाला मामला क्या है?’ मैंने कहा, ‘जी, बताइए.’ अनोखे ने कहा, ‘15 फरवरी 2012 को अरब सागर में केरल के तट पर दो भारतीय मछुआरों की इटली के दो नाविकों – मैसिमिलियानो लाटोरे और सल्वातोरे गिरोने ने इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी क्योंकि उन्हें लगा कि वो समुद्री लुटेरे हैं. उनकी दलील है कि गोली आत्मरक्षा में चलायी गयी और उस वक़्त उनका जहाज़ अन्तर्राष्ट्रीय जल-सीमा में था. लिहाज़ा, उन पर भारतीय क़ानून के तहत मुक़दमा नहीं चल सकता. मामला अभी ‘इंटरनैशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सीज’ के विचाराधीन है. हमारा सुप्रीम कोर्ट भी अभी तक क्षेत्राधिकार तय नहीं कर पाया है. एक नाविक इलाज़ करवाने के लिए इटली में है. दूसरा दिल्ली स्थित अपने दूतावास में. क्रिश्चियन मिशेल के आरोप पर इटली की सरकार ख़ामोश है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे ‘बकवास’ बताया है.’ मैंने कहा, ‘वाह भाई, अनोखे लाल! आप वाकई अनोखे हैं. एक साँस में सारी कहानी सुना दी. लेकिन ये तय कैसे हुआ कि क्रिश्चियन मिशेल ने मोदी जी की पोल खोल दी कि वो गाँधी परिवार की तबाही देखना चाहते हैं?’ अनोखे बोला, ‘अभी नैशनल हेराल्ड का मामला देखा था न आपने! संसद में कितना हंगामा हुआ. अब मिशेल के आरोप को लेकर कोहराम होगा. मुझे एक बात बताइए, बोफोर्स से किसे क्या मिला? आगस्टा भी क्या वही नहीं है? सोनिया गाँधी की नाक के नीचे ही हेलिकॉप्टर सौदा हुआ. उनकी सरकार ने ही उसे रद्द किया. अब मोदी सरकार पूरी ताक़त से उनके ख़िलाफ़ सबूत ढूँढ़ रही है. सबूत मिल गये तो ठीक, वर्ना गढ़े जाएँगे. ताकि दशकों तक मुद्दा गरमाया रहे. काँग्रेस बचाव में लगी रहे. ये उसे चोर-चोर कहते रहें. और, देश से कहें कि हमें ही ढोते रहो. यही राजनीति है.’ मैंने कहा, ‘बेशक, यही राजनीति है. लेकिन इसमें हर्ज़ क्या है? सभी यही करते हैं.’ अनोखे बोला, ‘नहीं साहब, ये राजनीति ज़्यादा दिन तक नहीं चलती. राजनीति में विरोधी कमज़ोर हो, तो चलेगा. लेकिन उसे मटियामेट करने से फ़ायदा नहीं होता. क्योंकि एक मटियामेट होगा तो कोई दूसरा उसकी जगह ले लेगा. राजनीति में सत्ता पक्ष को जनता की ज़िन्दगी आसान करने पर ध्यान देना चाहिए. विपक्ष का काम है खिंचाई करना. आप उसकी खिंचाइयों से बचने की कोशिश कीजिए. यही लोक-लाज़ है. इसकी परवाह कीजिए. लेकिन मोदी जी का स्वभाव है वो विरोधी को पछाड़ने में नहीं, मिटाने में फ़ायदा देखते हैं! काँग्रेस को मिटा देना चाहते हैं. ग़लत दिशा में जा रहे हैं. पछताएँगे.’ मैंने बातचीत को यही विराम दिया. अनोखे लाल का शुक्रिया अदा किया. फिर मिलेंगे, कहकर उनसे विदा ली. रास्ते भर सोचना रहा, राजनीति के बारे में कितनी गहरी समझ है इस देश के आम आदमी की! कभी इसी तबक़े ने काँग्रेस को ज़मींदोज़ किया था. आज यही मोदी में ख़ोट देख रहा है

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हिरदेश राय द्वारा बनायीं गयी शार्ट फिल्म सलाम तिरंगा

हिरदेश राय द्वारा बनायीं गयी शार्ट फिल्म सलाम तिरंगा

मुंबई में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से उज्जैन से गए एथलीट दल ने मिनी मेराथन में सिंहस्थ की ब्रांडिंग करने के बाद भेंट की।

मुम्बई मेराथन में छाया सिंहस्थ
दुनिया की सबसे बड़ी चेरिटी रेस में उज्जैन के एथलीट दल ने की ब्राण्डिंग

मुम्बई में हुई दुनिया की सबसे बड़ी चेरिटी रेस मिनी मेराथन में सिंहस्थ-2016 छाया रहा। इसमें उज्जैन से गये 12 सदस्यीय एथलीट दल ने सिंहस्थ की ब्राण्डिंग्र की।

स्टेण्डर्ड चार्टर्ड बैंक मुम्बई द्वारा आयोजित 21 किलोमीटर लम्बी मेराथन में उज्जैन के एथलीट दल ने श्री अब्दुल वहाब और श्री अमन मिश्रा के नेतृत्व में भाग लिया। मेराथन के दौरान दल ने सिंहस्थ की प्रचार सामग्री वितरित की और लोगों को सिंहस्थ में भाग लेने का आमंत्रण दिया। इस मेराथन में 22 हजार लोगों ने भाग लिया। इसमें भाग लेने वाले उज्जैन के दल के सदस्यों को मेडल दिये गये।

राष्ट्रपति 9 से 10 जनवरी तक झारखंड का दौरा करेंगे

राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी 9 से 10 जनवरी, 2016 तक झारखंड का दौरा करेंगे।

राष्ट्रपति 9 जनवरी, 2016 को हजारीबाग में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे। उसी दिन वह एक कला दीर्घा का उद्घाटन करेंगे और रांची के ऑड्रे हाउस में झारखंड तकनीक विश्वविद्यालय का शिलान्यास करेंगे।

10 जनवरी, 2016 को राष्ट्रपति रांची में निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के 88वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। दिल्ली लौटने से पहले वह बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन करेंगे और रांची में इसके दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगे।

शत्रु संपत्‍ति अध्‍यादेश, 2016 जारी किया गया

भारत के राष्‍ट्रपति ने शत्रु संपत्‍ति अधिनियम, 1968 में संशोधन करने के लिए 7 जनवरी, 2016 को शत्रु संपत्‍ति (संशोधन और विधिमान्‍यकरण) अध्‍यादेश 2016 जारी कर दिया है।

अध्‍यादेश के माध्‍यम से इस संशोधन में शामिल है कि यदि एक शत्रु संपत्‍ति संरक्षक के निहित है, तो यह शत्रु, शत्रु विषयक अथवा शत्रु फर्म का विचार किए बिना, अभिरक्षक के निहित ही रहेगी। यदि मृत्‍यु आदि जैसे कारणों की वजह से शत्रु संपत्‍ति के रूप में इसे स्‍थगित भी कर दिया जाता है, तो भी यह अभिरक्षक के ही निहित रहेगी। उत्‍तराधिकार का कानून शत्रु संपत्‍ति पर लागू नहीं होता। एक शत्रु अथवा शत्रु विषयक अथवा शत्रु फर्म के द्वारा अभिरक्षक में निहित किसी भी संपत्‍ति का हस्‍तांतरण नहीं किया जा सकता और अभिरक्षक शत्रु संपत्‍ति की तब तक सुरक्षा करेगा जब तक अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप इसका निपटारा नहीं होता।

शत्रु संपत्‍ति अधिनियम, 1968 में उपर्युक्‍त संशोधनों से इस अधिनियम में मौजूद कमियों को दूर किया जा सकेगा और यह सुनिश्‍चित किया जाएगा कि अभिरक्षक के निहित शत्रु संपत्तियां ऐसी ही बनी रहेंगी और इन्‍हें शत्रु अथवा शत्रु फर्म को वापस नहीं किया जा सकता।

शत्रु संपत्‍ति अधिनियम को भारत सरकार ने 1968 में लागू किया था, जिसके अंतर्गत अभिरक्षण में शत्रु संपत्‍ति को रखने की सुविधा प्रदान की गई थी। केंद्र सरकार भारत में शत्रु संपत्‍ति के अभिरक्षण के माध्‍यम से देश के विभिन्‍न राज्‍यों में फैली शत्रु संपत्‍तियों को अपने अधिकार में रखती है, इसके अलावा शत्रु संपत्‍तियों के तौर पर चल संपत्‍तियों की श्रेणियां भी शामिल है।

यह सुनिश्‍चित करने के लिए कि शत्रु संपत्‍ति पर अभिरक्षण जारी रहे, तत्‍कालीन सरकार के द्वारा 2010 में शत्रु संपत्‍ति अधिनियम, 1968 में एक अध्‍यादेश के द्वारा उपयुक्‍त संशोधन किए गए थे। हालांकि यह अध्‍यादेश 6 सितंबर, 2010 को समाप्‍त हो गया था और 22 जुलाई, 2010 को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया। हालांकि, इस विधेयक को वापस ले लिया गया और 15 नंवबर, 2010 को लोकसभा में संशोधित प्रावधानों के साथ एक और विधेयक पेश किया गया। इसके पश्‍चात इस विधेयक को स्‍थायी समिति के पास भेज दिया गया। हालांकि यह विधेयक लोकसभा के 15वें कार्यकाल के दौरान पारित नहीं हो सका और यह समाप्‍त हो गया।

1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के मद्देनजर, भारत से पाकिस्‍तान के लिए लोगों ने पलायन किया था। भारत रक्षा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए भारतीय रक्षा नियमों के तहत भारत सरकार ने ऐसे लोगों की संपत्‍तियों और कंपनियों को अपने अधिकार में ले लिया, जिन्‍होंने पाकिस्‍तान की नागरिकता ले ली थी। ये शत्रु संपत्‍तियां, भारत में शत्रु संपत्‍ति के अभिरक्षण के रूप में केंद्र सरकार द्वारा अभिरक्षित थीं।

1965 के युद्ध के बाद, भारत और पाकिस्‍तान ने 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद घोषणा पर हस्‍ताक्षर किए। ताशकंद घोषणा में शामिल एक खंड के अनुसार दोनों देश युद्ध के संदर्भ में एक-दूसरे के द्वारा कब्‍जा की गई संपत्‍ति और परिसंपत्‍तियों को लौटाने पर विचार-विमर्श करेंगे। हालांकि पाकिस्‍तान सरकार ने वर्ष 1971 में स्‍वयं ही अपने देश में इस तरह कि सभी संपत्‍तियों का निपटारा कर दिया।

मैंने सोनिया गांधी के इशारे पर नहीं किया कोई काम: आजाद

भाजपा से निलंबित सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने उनके ऊपर लगातार लग रहे आरोपों का खंडन किया है। आजाद ने कहा कि वह सोनिया गांधी के इशारे पर कोई काम नहीं किया बल्कि एक खिलाड़ी होने के मुताबिक ऐसी धांधलियों के खिलाफ आवाज उठाया। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर लोकसभा में सवाल उठाए। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। भाजपा के प्रवक्ता मीडिया में कुछ इसी तरह के आरोप लगा रहे हैं लेकिन मैं उनको बताना चाहता हूं कि लोकसभा की नियमावली के मुताबिक संसद में बोलने का अधिकार सिर्फ उसी को मिलता है जिसे सदन के अध्यक्ष ने अनुमति दी हो। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रवक्ता बिना मुझसे बात किए ही मेरे ऊपर ऐसे फिजुल के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे आरोप लगाकर वे सदन के अध्यक्ष की गरिमा को भी धूमिल कर रहे हैं। अध्यक्ष के अनुमति के बाद ही उन्होंने लोकसभा में दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में हुए कथिततौर पर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था।

भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति निलयम पर पुस्तक की प्रति राज्यपाल नरसिम्हन को भेंट की

भारत के राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज (21 दिसंबर 2015) सिकंदराबाद के राष्‍ट्रपति निलयम मेंतेलंगाना के राज्‍यपाल श्री ईएसएल नरसिम्‍हन को सिकंदराबाद के राष्‍ट्रपति निलयम पर पुस्‍तक की प्रति भेंट की। हैदराबाद की संरक्षण वास्तुकार सुश्री अनुराधा नाइक, जिन्‍होंने इस पुस्‍तक के बोलारम और राष्ट्रपति निलयम पर अध्याय लिखे हैं, भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।

‘द प्रेसीडेंसियल रिट्रीट्स ऑफ इंडिया’ राष्ट्रपति सचिवालय के आयोग के अंतर्गत सहपीडिया और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) द्वारा तैयार की गई है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में मशोबरा में ‘द रिट्रीट’ और सिकंदराबाद में ‘राष्ट्रपति निलायम’ को शामिल किया गया है और यह जल्‍दी ही लोगों के लिए उपलब्‍ध होगी। इस पुस्‍तक का औपचारिक विमोचन राष्‍ट्रपति के जन्‍मदिन, 11 दिसंबर 2015 को नई दिल्‍ली में किया गया था। प्रसिद्ध लेखक गिलियन राइट ने इस पुस्‍तक को संपादित किया है, जिन्‍होंने राष्‍ट्रपति निलयन में गुजरी उनकी जिंदगी पर एक अध्‍याय भी लिखा है। पुरस्कार विजेता फोटोग्राफर आंद्रे जीनपेरे फैंथोम ने तस्वीरें ली हैं। राष्‍ट्रपति निलयम पर अध्‍यायों के शीर्षक हैं – ‘’द सुप्रीम कमांडर्स साउथर्न रिट्रीट : बोलारम’’, ‘’ऑफ प्रेसिडेंट्स, रेसिडेंट्स एंड देयर रेसिडेंस : द स्‍टोरी ऑफ द राष्‍ट्रपति निलयम’’ और ‘’द साउथर्न सोजौर्न’’ हैं।

पुस्‍तक में शामिल कुछ महत्‍वपूर्ण निष्‍कर्ष इस प्रकार हैं :

• बोलारम रेसीडेंसी हाउस का निर्माण 1833 में हुआ था। तब तक ब्रिटिश रेसीडेंसी कोटि में थी, जो 1803 में बनी थी, और जो निवास का मुख्‍य स्‍थल था। बोलारम में इसलिए बनाया गया था ताकि रेसीडेंसी अपने सैनिक के नजदीक और निजाम के दरबार और बाजारों से दूर रह सके।

• रेसीडेंसी हाउस का स्‍थान बहुत सोच-समझ कर चुना गया था। यह दक्षिण में सिकंदराबाद छावनी और उत्‍तर में बोलारम छावनी से संरक्षित है।

• पूरी उन्नीसवीं सदी के दौरान ब्रिटिश और निजाम के बीच मौजूद तनाव के बावजूद, निवासी और शासक बोलारम में पड़ोसियों की तरह मिलजुलकर रहते थे।

• हालांकि इमारत दिखने में औपनिवेशिक थी, लेकिन वह स्‍थानीय सामग्रियों का इस्‍तेमाल करके और निजाम की सरकार द्वारा उपलब्‍ध कराए गए मजदूरों ने बनाई थी।