भोग के भूखें नही होते भगवान

भरतपुर। इंदिरा नगर हीरादास चौराहे के पास चल रही श्रीमद् भागवत कथा के कथा वाचक पं. गिरधर लाल ने भगवान और भक्त के बीच संबंधों पर चर्चा की । प्रवचन करने गिरधर लाल ने कहा कि भगवान भोग के नहीं भाव के भूखे होते उन्हें।श्रद्धा ,भक्तिपूर्ण तरीके से भोग लगाने वाले भक्त का कल्याण अवश्य होता है।उन्होनें इस संबंध में एक कथा सुनाई ।उन्होनें कहा कि भगवान भोग के नहीं वरन भाव के भूखे होते है क्योंकि भगवान अगर भोग के भूखे होते तो गरीबों का तो नंबर ही नहीं आता। कथा के बीच-बीच में भजनों की ब्यार बहती रही थी जिस पर भक्त और महिलाऐं भक्तिभाव में विभोर होकर नाचने लगें

अधिकारियों को शुभकामनाओं के साथ मिल रही गिफ्ट्स

भोपाल। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन पूरे देश में दीपावली पर्व की धूम रहेगी। पर्व मनाने को लेकर हर वर्ग ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां कर रखी हैं। हर बार की तरह इस बार भी शासकीय विभागों के अधिकारियों व वरिष्ट प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों की दीपावली और अधिक रोशन होगी, क्योंकि ये लोग तो दीपावली पर उपहारों से नवाजे जा रहे हैं। दीवाला तो प्रदेश के उन अन्नदाताओं के लिए है, जो विगत 4-5 वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं का कोपभाजन बनकर मुआवजा पाने दर-दर भटक रहे हैं।

विगत दो-तीन दिनों से बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के शासकीय आवासों पर विभाग प्रमुखों व अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों का तांता लगा हुआ है। सभी साहब को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। दफ्तर में पहुंचे तो और बात है पर जब घर पर जायेंगे तो कोई न कोई नजराना तो साथ होगा ही। जितने लोग भीतर जाते दिखे सभी के हाथों में पैकेट तो थे पर पैकेट के भीतर क्या है ये साहब और देने वालों को ही पता होगा। इसी प्रकार, छोटे कर्मचारियों को भी सरकार ने 6 प्रतिशत डीए बढ़ाकर दीपावली का तोहफा दिया है। वहीं, अपने विभाग से उन्हें दिवाली गिफ्ट मिल गए हैं।

नापतौल निरीक्षकों को दोषी व्यापारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश

दीपावली के त्यौहार को देखते हुए भोपाल में नाप तौल निरीक्षकों को गड़बड़ी पाये जाने पर दोषी व्यापारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। खाद्य-नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने उपभोक्ताओं को नाप तौल में गड़बड़ी होने पर नाप तौल निरीक्षक से मदद लेने का आग्रह किया है। भोपाल संभाग में नाप तौल गड़बड़ी में पिछले 6 माह में दोषी व्यापारियों से दण्ड स्वरूप 75 लाख की राशि अर्जित की गयी है।

दीपावली के त्यौहार के मौके पर मिठाई, गिफ्ट और सराफा दुकान में अत्यधिक भीड़ होने से उपभोक्ता के शोषण की संभावना ज्यादा बनी रहती है। उपभोक्ता खरीदी के दौरान सजग रहें। उपभोक्ताओं को सलाह दी गयी है कि वे मिठाई खरीदते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि डिब्बे का वजन अलग से लिया जाये। पेकिंग वस्तुओं में अधिकतम फुटकर कीमत, बेच नम्बर और पेकिंग तिथि को आवश्यक रूप से देखा जाये।

मुख्यमंत्री चौहान को स्काउट एवं गाईड्स ध्वज लगाया

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आज यहाँ स्काउट एवं गाइड के स्थापना दिवस पर ध्वज लगाया गया। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान भी उपस्थित थे।

17 साल से बंद पड़ी कॉलेज की मशीनें

पन्ना । 1998 में टेक्निकल कॉलेज पॉलीटेक्निक को हैण्ड ओवर कर दिया गया, तब से यहां मैकेनिकल व्यवसाय पाठ्यक्रम बंद हो गया। करीब 17 साल गुजरने के बाद लाखों की लागत से खरीदी गई मैकेनिकल मशीन धूल और जंग खा रहीं हैं। कई मशीनें तो जाम तक हो चुकी हैं इसके बावजूद भी छात्र बंद मशीनों से प्रशिक्षण ले रहे हैं। पॉलीटेक्निक कालेज में लाखों रूपये लागत की मैकेनिकल मशीनों की हालत खराब है।

एक अनुमान के मुताबिक एक मशीन की कीमत 4 से 5 लाख रूपये हो चुकी है इसका कारण भी है कि जब टेक्निकल कालेज था तब इन मशीनों को उपयोग में लाया जाता रहा और प्रशिक्षणार्थी इन्ही मशीनों के सहारे प्रेक्टिकल करते रहे, मगर 1998 में उक्त व्यवसाय पाठ्यक्रम बंद कर पॉलिटेक्निक को हैण्ड ओवर कर दिया गया, जहां कम्प्यूटरीकृत कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाने लगा और इन मशीनों का उपयोग होना बंद कर दिया गया।

पूर्व मंत्री ने फिर कराई शुरूआत

विधानसभा पवई क्षेत्र के पूर्व कृषि राज्य मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने पवई विधानसभा क्षेत्र में पॉलीटेक्निक का शुभारंभ कराया, लेकिन क्षेत्र में संस्था को भवन उपलब्ध न हो सका, जिसके लिये पन्ना पॉलीटेक्निक में ही इसका संचालन कराया गया। जहां मेकेनिकल कोर्स के अलावा अन्य कोर्स भी चले, मगर मैकेनिकल के नाम पर कुछ भी नहीं रहा तो पढऩे वाले छात्र किस चीज से प्रशिक्षण दिया जाता रहा। पन्ना पॉलीटेक्निक के नाम पर बंद मशीन दिखाकर इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता रहा। पन्ना पॉलीटेक्निक में भले ही उक्त व्यवसाय पाठ्यक्रम बाद में बंद हो गये हों, लेकिन पवई में मैकेनिकल का कोर्स चार वर्षों से चल रहा है जहां न भवन है और न स्टॉफ अब आप खुद अनुमान लगा सकते हैं, कि पवई पॉलीटेक्निक के छात्र क्या क्या पढ़ते हैं।

17 साल से कटा विद्युत कनेक्शन

इस संबंध में पवई पॉलीटेक्निक के प्राचार्य ने बताया कि अभी तक उक्त मशीनें पवई को हैण्डओवर नहीं की गई, विद्युत कनेक्शन कटा हुआ है। भारी मशीनों को चलाने के लिए तीन फेस का कनेक्शन चाहिए, जिसके लिये विद्युत मंडल से चर्चा की गई लेकिन, कितना बकाया है, यहां इसका कोई रिकोर्ड उपलब्ध न हो सका तो वही विद्युत मंडल में रिकार्ड की माने तो 2 लाख रूपये की राशि बकाया है । पवई पॉलीटेक्निक संस्था को चालू हुये चार वर्ष हो चुके हैं।

पूर्व मंत्री के कार्यकाल में इनकी विधानसभा में इसका शुभारंभ तो कर दिया गया लेकिन संस्था के लिये भवन उपलब्ध नहीं कराया गया। शासन द्वारा भवन के लिये जमीन और निर्माण के लिये लगभग 7 करोड़ 81 लाख भी विभाग द्वारा भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका। जिस स्थान पर पॉलीटेक्निक भवन बनकर तैयार होना था उस जगह लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया। संस्था के प्राचार्य ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग अतिक्रमण न हटा सका, बाद में संस्था के स्टाफ ने खुद अतिक्रमण हटाने का काम कर भवन निर्माण कराये जाने का दबाव विभाग पर बनाया, तब कहीं जाकर निर्माण कार्य शुरू हो सका।

कहां बैठे 160 विद्यार्थी

करीब चार वर्षों बाद पवई क्षेत्र में पॉलीटेक्निक कालेज की नीव डाली गई, जिसमें मैकेनिकल के अलावा अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को प्रशिक्षण दिया जाना था, लेकिन शासन ने तो शुभारंभ कर दिया मगर उक्त संस्था को भवन मुहैया न करा सका और न ही व्यवसायिक पदो की पूर्ति कर सका। ऐसे में लगभग 160 प्रशिक्षर्थी कहां पढ़ते होंगे और किस चीज का पे्रक्टिकल करते होंगे, अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन संस्था द्वारा पवई पॉलीटेक्निक के छात्र पन्ना पॉलीटेक्निक में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिन्हें काफी कठनाइयों उठानी पड़ती हैं। इस संबंध में पवई का और काम पन्ना में क्षेत्रवासी अपने क्षेत्र में इसका संचालन कराना चाहते हैं ताकि इनके बच्चों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

ई-कार्ड से राशन मिलने से बंद होगी गड़बड़ी

संचालक के अलावा अन्य नहीं शुरू कर सकेगा मशीन

भोपाल । मध्यप्रदेश में अब जल्द ही आम जनता को ई-कार्ड से राशन मिलने लगेगा। राशन की कालाबाजारी रोकने की सरकार की ई कार्ड योजना अब जल्द ही मूर्त रूप लेने जा रही है। जिले की पांच दुकानों पर योजना की मशीन को लगाकर राशन का वितरण आरंभ भी कर दिया गया है। मशीन को खोलने के लिए दिए गए पासवर्ड का उपयोग कर संचालक ही उसे शुरू कर सकेगा। इसी तरह पर्ची में शामिल नाम में से कोई व्यक्ति ही अपना अंगूठा लगाकर या आईडी से पहचान सामने आने पर ही राशन ले सकेगा।

ई राशन कार्ड की तैयारी जिले में पूरी तरह से की जा चुकी है। वर्ष 2018 तक सभी कार्डधारियों को ई राशन कार्ड देने के साथ ही दुकानों पर अंगूठे के निशान और आईडी से ही राशन दिया जाएगा। सहायक आपूर्ति अधिकारी श्री शर्मा के अनुसार वर्तमान मे योजना को लेकर प्रायोगिक तौर पर पांच दुकानों पर दिल्ली से आई मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों को संचालक दिए गए पासवर्ड से ही आरंभ कर सकता है।

इसी तरह कार्ड धारक के परिजन में से किसी के आने पर ही राशन दिया जाएगा। अन्य व्यक्ति यदि पर्ची लेकर आता है, तो इस मशीन में लोड डाटा से उसके आईडी की पहचान नहीं होने पर दुकानदार राशन नहीं देगा। इसी तरह भविष्य में आधार और अंगूठा निशान मिलान होने पर ही राशन मिल सकेगा। शर्मा के अनुसार राशन की कालाबाजारी रोकने व गरीबों को उनके हक का राशन मिल सके इसके लिए शासन ने यह योजना आरंभ की है।

सॉफ्टेवयर पर ऑनलाईन दर्ज करायें- कलेक्टर

शासन द्वारा चलाये जा रहे विशेष अभियान तहत जाति प्रमाण पत्रों को जिले के समस्त विकासख्ण्ड ोत समन्यक आगामी ५ नवम्बर तक शेष बचे आवेदन पत्रों को शत-प्रतिशत तैयार कराकर संबंधित केन्द्रों को उपलब्ध कराये और समस्त लोक सेवा केन्द्रों के संचालक कक्षा १ के सभी आवेदन पत्र लोक सेवा प्रबंधन विभाग के सॉफ्टेवयर पर ऑनलाईन दर्ज करायें।

यह बात गत दिवस कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने विशेष अभियान के तहत जाति प्रमाण पत्रों को तैयार किये जाने संबंधी बैठक में अधिकारियों एवं लोक सेवा केन्द्र के संचालकों से कही। बैठक में सीईओ जिला पंचायत डॉ. जगदीश जटिया, अपर कलेक्टर अनिल शुक्ला, संयुक्त कलेक्टर नंदा कुशरे, एसडीएम दमोह राकेश कुशरे, एसडीएम हटा नंदलाल सामरथ, एसडीएम पथरिया एस.के.अहिरवार, एसडीएम तेन्दूख़ेडा डॉ. सी.पी.पटैल सहित जिले के समस्त लोक सेवा केन्द्रों के संचालक मौजूद थे।

कलेक्टर डॉ.शर्मा ने लोक सेवा केन्द्रों के संचालकों को विशेष अभियान २०१४-१५ अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा जाति प्रमाण पत्र के आवेदन पत्रों का निराकरण कर जारी किये गये जाति प्रमाण पत्रों (हिन्दी, अंग्रेजी) को नियमानुसार ङ्क्षप्रट एवं लेमीनेशन कराकर ७ नवम्बर तक संबंधित बीईओ, बीआरसी, जन शिक्षा केन्द्रों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने तथा लोक सेवा केन्द्र हटा द्वारा जाति प्रमाण पत्रों के ङ्क्षप्रङ्क्षटग, लेमीनेशन के कार्य में प्रगति न होने पर संचालक लोक सेवा केन्द्र हटा को कारण नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी एसडीएम को लंबित आवेदन पत्रों के त्वरित निराकरण करने निर्देश दिये।

सीईओ जिला पंचायत डॉ. जगदीश जटिया ने समस्त विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखण्ड ोत समन्वयक को निर्देशित किया कि आगामी ५ नवम्बर तक विद्यालय वार शेष बचे आवेदन पत्रों को शत प्रतिशत तैयार कराकर संबधित लोक सेवा केन्द्रों को उपलब्ध करायें। उन्होंने समस्त लोक सेवा केन्द्रों के संचालकों से कहा ५ नवम्बर तक विशेष अभियान २०१४-१५ अंतर्गत प्राप्त होने वाले समस्त आवेदन पत्रों को लोक सेवा प्रबंधन विभाग के साफ्टवेयर पर ऑनलाईन दर्ज करायें। उन्होंने बताया जिले में अनुविभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दमोह १०८८, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) हटा ६५, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तेन्दूख़ेडा ७२४ तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पथरिया ५९ आवेदन पत्र लंबित है।

६ नवम्बर को पुन: होगी समीक्षा
उन्होंने कहा विशेष अभियान तहत जाति प्रमाण पत्रों के संबंध में दिये गये निर्देशों पर की गई कार्यवाही के संबंध में ६ नवम्बर को प्रात: ११ बजे से पुन: समीक्षा की जायेगी। बैठक में सभी संबंधितों उपस्थित होने के लिये निर्देशित किया गया।

बच्चा नशे में था, लात मारने वाली मंत्री किस नशे में थीं ?

बच्चा नशे में था, लात मारने वाली मंत्री किस नशे में थीं ?
संजय मालवीया (विशेष संवाददाता )

भोपाल प्रदेश कांगे्रस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने पन्ना जिले में रोटी खाने के लिए एक रूपया मांगने वाले बच्चे को लात मारने वाली मंत्री कुसुम मेहदेले द्वारा अपने बचाव में यह कहे जाने पर तीखी आपत्ति जतायी है कि ‘बच्चा नशे में था’, पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस गरीब बच्चे के पास रोटी खाने के लिए पैसे नहीं थे, वह शराब के पैसे कहां से लाता और यदि यह मान भी लिया जाये कि वह नशे में था, तो मेहदेले किस नशे में थीं? शायद सत्ता के नशे ने उन्हें ऐसी अमर्यादित हरकत करने के लिए बाध्य कर दिया होगा?
मिश्रा ने कहा कि मंत्री मेहदेले के इस आचरण से दो विचारणीय प्रश्न उपस्थित हो रहे हैं, पहला यह कि प्रदेश के हर कस्बे, मोहल्ले, गांव और शहरों मंे शराब की बिक्री कौन करवा रहा है और दूसरा यह कि यदि स्वर्णिम मध्य प्रदेश विकास और प्रगति का पर्याय बन चुका है तो मामा शिवराज के राज में उनके भूखे भांजे भीख मांगने के लिए मजबूर क्यों हैं?

चिकित्सकों से मरहूम है मध्यप्रदेश का पन्ना जिला

मध्यप्रदेश में इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही नहीं तो और क्या माना जाए कि एक तरफ नई-नई बिमारियां रोज दस्तक दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर यहां सूबे के इस जिले में रहने वालों के लिए चिकित्सकीय दृष्टि से कोई पुख्ता इंतजाम सरकार ने नहीं किए हैं। हालात इतने खराब हैं कि जिले की दस लाख की आबादी को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। ऐसा इसीलिए भी कहा जा रहा है क्यों कि यहां डॉक्टरों के करीब 70 फीसदी पद रिक्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा खराब स्थिित प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्रों की है।

राज्य के इस जिले की स्वास्थ्य रिपोर्ट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टरों की कमी के चलते जिला मातृ शिशु मृत्यु दर, कुपोषण, एड्स, मलेरिया, सिलीकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों में यह मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे आगे की पंक्ति में है। वहीं संस्थागत प्रसव होने के बाद बच्चों की मौत यहां सबसे अधिक होती हैं। इसके अलावा अब सामान्य हो चुकी मलेरिया जैसी बीमारियों का भी सही उपचार नहीं मिलने के कारण रोज न जाने कितने लोग मौत की नींद सो जाते हैं। जबकि जिला मुख्यालय में 232 सीटों के जिला अस्पताल के अलावा 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सहित ढेरों उप स्वास्थ्य केन्द्र व आयोग्य केन्द्र हैं। यहां न उपचार की समुचित व्यवस्था है और न ही डॉक्टरों की।

निजी अस्पताल नहीं होने से हालात और खराब

पन्ना का यह दुर्भाग्य ही माना जा सकता है कि एक ओर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर जैसे प्रदेश के जिले मेडिकल सुविधाएं देने में हब का रूप ले चुके हैं, तो दूसरी तरफ मुरैना, शिवपुरी, गुना, बैतूल, छतरपुर, हरदा, होशंगाबाद, मंदसौर, रतलाम जैसे जिलों में तमाम निजि चिकित्सालय चल रहे हैं, वहीं इस जिले में कोई भी प्राईवेट नर्सिंग होम या अस्पताल नहीं है जिसके कारण बिमारों का एक ही सहारा बचना है, वह है सरकारी अस्पताल। स्वास्थ्य व्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है यह साफ दिखाई देने के वाबजूद यहां सरकारी स्तर पर कोई सकारात्मक प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। इस संबंध में दिनेश उमरे, हरीश पाण्डे, मनोज जायसवाल ने हिस को बताया कि सरकारी अस्पताल की सेवाएं लेना हमारी मजबूरी है। पन्ना अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है, डिजिटल एक्सरे के लिए लोगों को जिले के बाहर जाना पड़ता है। यहां तक कि कई प्रकार की पैथॉलाजी जांच, सीटी स्कैन, एमआर आर आदि के लिए अन्य शहरों की ओर रूख करना हमारी मजबूरी बन गई है।

10 लाख की आबादी पर 37 डॉक्टर

जिलेभर में 107 डॉक्टरों की आवश्यकता है । लेकिन वर्तमान में महज 37 डॉक्टर ही अपनी सेवा दे रहे हैं। जिले में इन 37 डॉक्टरों के भरोसे ही 10 लाख की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है । सी.एम.एच.ओ. कार्यालय से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय सहित जिला क्षय केन्द्र, फाइलेरिया सर्वेक्षण केन्द्र, नेत्र चलित इकाई, शहरी परिवार कल्याण केन्द्र, ट्रामा सेंटर में कुल 48 डॉक्टरों की आवश्यकता है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर के 25 पदों पर महज 11 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं जबकि चिकित्सा अधिकारी के रूप में स्वीकृत 23 पदों में सिर्फ 14 ही उपलब्ध हैं।

22 विशेषज्ञों में एक भी पदस्थ नहीं

जिले भर के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का हाल तो और भी बुरा है। यहां स्वीकृत 22 विशेषज्ञ चिकित्सकों में से कोई एक पद पर भी यहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। जबकि 37 स्वीकृत चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर 14 डॉक्टर्स पूरे जिले का जिम्मा संभाले हैं। इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है, कि चिकित्सकों, कार्यालय स्टाफ से लेकर मेडिकल स्टाफ तक की कमी से जूझते इस जिले में संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं कितनी बदहाल होंगी।

जिला चिकित्सालय व शहरी केन्द्रों में उपलब्धता

पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त

विशेषज्ञ चिकित्सक 25 11 14

चिकित्सा अधिकारी 23 14 09

सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थिति

पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
विशेषज्ञ चिकित्सक 22 00 22
चिकित्सा अधिकारी 37 14 23

मध्यप्रदेश में सूखे से 19 हजार 900 गाँव

भोपाल। मध्यप्रदेश के 19 हजार 900 गांव सूखे की चपेट में हैं, यह बात राज्य सरकार ने स्वीकार कर ली है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए है कि प्रदेश में सूखे से प्रभावित सभी किसानों को राहत राशि दी जाए। उन्होंने कहा कि फसल बीमा की राशि किसानों को शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शुक्रवार को प्रदेश में सूखे की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ है। इस दौरान बताया गया कि गत खरीफ की फसल बीमा की 515 करोड़ की राशि शीघ्र करीब सवा चार लाख किसानों को वितरित की जाएगी। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार प्रदेश के 23 जिलों की 114 तहसीलों के 19 हजार 900 गाँव प्रभावित हुए हैं। इनमें फसलों से हुए नुकसान पर करीब 1650 करोड़ रूपए राहत राशि की माँग प्रभावित जिलों से की गई है। बैठक में कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, राजस्व मंत्री रामपाल सिंह और मुख्य सचिव अन्टोनी डिसा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिलेवार सूखे और फसलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि नुकसान का सर्वे वैज्ञानिक तरीके से आगामी 20 अक्टूबर तक पूरा किया जाए। जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं उन्हें राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। किसानों को निराशा से निकाला जाए। जरूरतमंद किसानों को मदद करने के उदार दृष्टिकोण से कार्य करें। फसल बीमा योजना का अधिकतम लाभ किसानों को दिलाया जाए। प्रारंभिक अनुमान में प्राप्त जानकारी का एक बार फिर से परीक्षण किया जाए। केन्द्र से फसल नुकसान में सहायता के लिए मेमोरेंडम तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रधानमंत्री, केन्द्रीय वित्त मंत्री और केन्द्रीय गृह मंत्री से मिलकर प्रदेश में सूखे से हुए नुकसान की जानकारी देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों की फसलें सूखे से प्रभावित हुई हैं उनके फसल ऋण वसूली स्थगित की जाएं। उन्हें रबी की फसल के लिए फसल ऋण उपलब्ध करवाए जाये। प्रभावित ग्रामों में राहत कार्य शुरू किए जाएं। रबी की फसलों के लिए किसानों को सिंचाई के लिए सलाह दी जाए। आगामी रबी के लिए अभी से योजना बनाकर किसानों की मदद की जाए। कृषि के लिए दीर्घकालीन योजना बनाई जाए ताकि किसानों को बार-बार होने वाली आपदाओं से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस संबंध में गठित टास्कफोर्स की बैठक शीघ्र कराई जाए। प्रभावित जिलों में पेयजल की उपलब्धता का आंकलन किया जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार सूखे से प्रदेश में सोयाबीन, उड़द, अरहर, मक्का और धान की फसलें प्रभावित हुई हैं। जिन ग्रामों में किसानों की फसलें 33 से 50 प्रतिशत तक खराब हुई हैं उनके अल्पकालीन फसल ऋणों को दो साल के लिए मध्यकालीन ऋण में तथा जिन किसानों की फसलें 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रभावित हुई हैं उनके अल्पकालीन फसल ऋणों को तीन वर्ष के लिस मध्यकालीन ऋण में परिवर्तित किया जाएगा। मध्यकालीन अवधि में परिवर्तन होने वाले ऋण पर लगने वाले ब्याज का व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। जिन किसानों का अल्पकालीन ऋण मध्यकालीन ऋण में परिवर्तित किया जाएगा उन किसानों को वर्तमान में डिफॉल्टर नहीं मानते हुए नया ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सूखा प्रभावित ग्रामों में मनरेगा के तहत 100 दिन के बजाए 150 दिन का काम उपलब्ध कराया जाएगा। रबी 2014-15 की फसल बीमा की करीब 300 करोड़ रूपए की राशि किसानों को आगामी नवम्बर माह तक वितरित की जाएगी। पिछली रबी में 28 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की गई थी। इस वर्ष रबी में 28 लाख 50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की जाएगी।